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GADVASU में मछली पालकों ने सीखी बारिकियां, जाना कैसे बढ़ेगा फिशरीज में उत्पादन और फायदा

ट्रेनिंग के दौरान तालाब का दौरा करते मछली पालक.

नई दिल्ली. गुरु अंगद देव पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (GADVASU) के मत्स्य पालन महाविद्यालय (सीओएफ) में मछली पालन पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया. जिसमें पंजाब और आसपास के राज्यों के विभिन्न जिलों से आए 23 बिजनेस करने की चाहत रखने वाले लोगों ने हिस्सा लिया. ट्रेनिंग प्रोग्राम को शुरुआती लोगों के लिए सूचना देने और तकनीकी सत्रों में बांटा गया था. डॉ. वनीत इंदर कौर ने जलकृषि वैज्ञानिकों, डॉ. अमित मंडल और डॉ. खुशवीर सिंह के समन्वय में ये कार्यक्रम आयोजित किया गया था.

कुलपति डॉ. जेपीएस गिल ने बताया कि विश्वविद्यालय अपने त्रि-स्तरीय ढांचे के माध्यम से पशु आहार उत्पादन प्रणालियों को उन्नत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, जिसमें कुशल मानव संसाधन उत्पादन, प्रौद्योगिकी निर्माण और आउटरीच कार्यक्रम शामिल हैं.

एक्सपर्ट ने क्या कहा
डॉ. वनीत इंदर कौर ने बताया कि तकनीकी ज्ञान के अलावा, बेहतरीन मैनेजमेंट मेथड (बीएमपी) पर ट्रेनिंग दिया. जिसमें जगह का चयन मछली तालाब का निर्माण, बीज की गुणवत्ता और भंडारण शामिल थे.

पानी की गुणवत्ता, फीड और हैल्थ मैनेजमेंट, बायो सिक्योरिटी, संचयन, प्रोसे​सिंग, मूल्य संवर्धन और बिक्री, पारंपरिक जलीय कृषि पद्धतियों के अतिरिक्त, प्रतिभागियों को पंगास कैटफिश जैसी उच्च उपज देने वाली प्रजातियों और कम पानी की आवश्यकता में उच्च उत्पादकता के लिए एक्वापोनिक्स, बायोफ्लोक और रीसर्क्युलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम जैसी जलवायु-अनुकूल गहन जलीय कृषि प्रणालियों से भी अवगत कराया गया.

मत्स्य आहार निर्माण के लिए अजोला उत्पादन, प्रोसेसिंग और सजावटी मत्स्य पालन सहित जलीय कृषि से संबंधित उद्यमशीलता गतिविधियों पर भी प्रतिभागियों के साथ चर्चा की गई.

मत्स्य मूल्य श्रृंखला की अनुभवजन्य समझ के लिए, प्रतिभागियों ने राजूर गांव में कुलबीर सिंह के फार्म और लुधियाना के आधुनिक मछली बाजार का दौरा किया.

इसके अलावा, उन्हें प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि योजना (पीएम-एमकेएसएसवाई) के अंतर्गत लाभार्थी सहायता प्राप्त करने के लिए विभिन्न प्रोत्साहन योजनाओं और राष्ट्रीय मत्स्य पालन डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म (एनएफडीपी) के बारे में भी जानकारी दी गई.

भविष्य में संदर्भ के लिए विभिन्न विषयों पर साहित्य भी वितरित किया गया. सीओएफ की डीन, डॉ. मीरा डी. अंसल ने बताया कि विश्वविद्यालय अत्याधुनिक कृषि सुविधाओं के साथ विविध क्षमता निर्माण कार्यक्रम प्रदान कर रहा है.

उन्होंने कहा कि जिसका उद्देश्य क्षेत्रीय मत्स्य पालकों और इच्छुक हितधारकों को जलीय कृषि और संबंधित मूल्य श्रृंखला उद्यमों के माध्यम से आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लिए जरूरी कौशल प्रदान करना है.

विस्तार शिक्षा निदेशक, डॉ. रविंदर सिंह ग्रेवाल ने किसानों को पशुधन और मत्स्य पालन क्षेत्रों में एक उद्यमी के रूप में सफल होने के लिए निरंतर तकनीकी सहायता और अद्यतन जानकारी के लिए विश्वविद्यालय से जुड़े रहने के लिए प्रोत्साहित किया.

Written by
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