Home मछली पालन Fish Farming: बायोफ्लॉक सिस्टम के तहत मछली पालन कर रहे हैं तो पढ़ें एक्सपर्ट की ये टिप्स
मछली पालन

Fish Farming: बायोफ्लॉक सिस्टम के तहत मछली पालन कर रहे हैं तो पढ़ें एक्सपर्ट की ये टिप्स

how to treat a fish ulcer
ऑक्सीजन की कमी ज्यादा है तो मशीनों की मदद से ऑक्सीजन पानी में छोड़ना चाहिए.

नई दिल्ली. बायोफ्लॉक सिस्टम के लिए सबसे बेहतरीन प्रजातियां तिलापिया, पंगेसियस, मांगुर और सिंघी होती है. क्योंकि यह मछलियां कम जगह और काम ऑक्सीजन में भी तेजी के साथ ग्रोथ हासिल करती हैं. वहीं अगर आप सीमेंट टैंक में मछली पालन करने चाहते हैं तो आसानी से मांगुर, सिंघी या झींगे को पाल सकते हैं. जिससे आपको अच्छा खासा मुनाफा होगा. मत्स्य विभाग, उत्तर प्रदेश (Fisheries Department, Uttar Pradesh) के एक्सपर्ट कहते हैं कि बायोफ्लॉक सिस्टम में मछलियों के वेस्ट से खाना तैयार किया जाता है. इसमें पानी और मौजूद कार्बन नाइट्रोजन का सही अनुपात बनाए रखना जरूरी होता है. जिससे अमोनिया और नाइट्रेट जैसे जहरीले तत्व कंट्रोल में रहें. इसके लिए गुड़ और मिलासिस मिलकर कार्बन की मात्रा को संतुलित कर सकते हैं.

साथ ही साथ पानी में ऑक्सीजन की पूर्ति के लिए 24 घंटे इरिऐशन चालू रहना चाहिए. प्रोबायोटिक का नियमित रूप से इस्तेमाल करते रहना चाहिए, जो सिस्टम को और ज्यादा मजबूत बनाने का काम करता है.

कौन सा फीड देना चाहिए
आप बायोफ्लॉक सिस्टम के तहत मछलियों को फ्लोटिंग फीड दे सकते हैं. जो सबसे उपयुक्त माना गया है. क्योंकि इसमें संतुलित पोषण होता है और पानी को जल्दी गंदा भी नहीं करता है.

आप घर पर बना हुआ फीड भी दे सकते हैं लेकिन उसमें पोषक तत्वों का संतुलन सही होना चाहिए, नहीं तो आप बाजार से खरीद कर फीड भी मछलियों को खिला सकते हैं.

बाजार से फीड नहीं खरीदना चाहते हैं तो घर से बना हुआ फीड दे सकते हैं. जिससे मछलियों को संतुलित पोषण नहीं मिल पाता और उनके ग्रोथ रुक जाती है.

मछलियों को ज्यादा खाना डाल देना यह राशन कम रखना या कार्बन और नाइट्रोजन का अनुपात बिगाड़ देना इसके अलावा बिजली की गड़बड़ी से भी यह पूरा सिस्टम बिगाड़ सकता है.

बायोफ्लॉक सिस्टम को सही रखने के लिए पानी की गुणवत्ता पर रोज निगरानी रखना जरूरी होता है.

अमोनिया नाइट्रेट जैसे पैरामीटर समय समय पर टेस्ट करते रहें. अगर किसी मछली में बीमारी के लक्षण दिखाई दें तो उसे तुरंत अलग कर देना चाहिए.

निष्कर्ष
पूरे सिस्टम की सफाई करनी चाहिए. प्रोबायोटिक का नियमित रूप से इस्तेमाल करना बेहद जरूरी होता है. अगर ये सभी काम करते हैं तो फिर मछली पालन में आपको फायदा होगा.

Written by
Livestock Animal News Team

Livestock Animal News is India’s premier livestock awareness portal dedicated to reliable and timely information.Every news article is thoroughly verified and curated by highly experienced authors and industry experts.

Related Articles

The State-wise number of coastal fishermen villages for development as Climate Resilient Coastal Fishermen Villages are envisaged in proportion to the total number of coastal fishermen villages in the State and at present
मछली पालनसरकारी स्की‍म

Fisheries: जलीय कृषि बीमा से मछली पालन में नुकसान की होती भरपाई

नई दिल्ली. जलीय कृषि बीमा यानि एक्वाकल्चर इंश्योरेंस एक तरह की वित्तीय...

shrimp farming in india
मछली पालन

Seafood Export: चीन और यूरोपीय संघ के सीफूड निर्यात मूल में 22 और 37 फीसद की बढ़ोतरी

नई दिल्ली. देश में सीफूड एक्सपोर्ट (Seafood Export) लगातार बढ़ रहा है....

shrimp farming problems
मछली पालन

Fisheries: टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने से भीमावरम फिशरीज क्लस्टर होगा मजबूत

नई दिल्ली. नेशनल फिशरीज डेवलपमेंट बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. बिजय...