नई दिल्ली. पशुओं को अगर बीमारी लग जाए तो फिर उनसे उत्पादन नहीं मिल पाता है. वहीं बकरियों में कई बीमारी होती है. जिसमें काक्सीडिया यानि कुकड़िया बीमारी बेहद ही खतरनाक है. इस बीमारी की वजह से बकरी पालक को आर्थिक नुकसान हो सकता है. भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI) की ओर से लाइव स्टॉक एनिमल न्यूज (Livestock Animal News) को दी गई जानकारी की मानें तो इस बीमारी में बकरियों में दस्त, भूख न लगना, कमजोरी और वजन घटना आम लक्षण हैं. इसके चलते बकरियों की जान भी चली जाती है. जबकि दूध और मीट दोनों का उत्पादन प्रभावित होता है.
IVRI के एक्सपर्ट की मानें तो ये रोग आंतों की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाता है, जिससे पोषक तत्वों का अवशोषण ठीक से नहीं हो पाता और बकरियां कमजोर हो जाती हैं.
बीमारी की डिटेल क्या है
काक्सीडिया (कुकड़िया) की बात की जाए तो यह बीमारी एक प्रोटोजोआ परजीवी आइमेरिया के द्वारा होती है. जिसमें 2 से 6 माह तक के बढ़ते हुए बच्चे मुख्य रूप से प्रभावित होते हैं.
इस रोग से प्रभावित बच्चों में बदबूदार दस्त, भयंकर कब्ज, पेट में दर्द, शरीर में खून की कमी, व निरंतर वजन में कमी मुख्य लक्षण होते हैं.
ज्यादा प्रभावित बच्चों की मौत भी हो जाती है. उपचार के बाद जो बच्चे रोग मुक्त हो जाते हैं उनकी वृद्धि रूक जाती है तथा शरीर पर बाल की पर्त खुरदरी (रफ) हो जाती है.
काक्सीडियोसिस दैनिक प्रबन्धन में किसी कमी के कारण होने वाला रोग है. इनकी रोकथाम एक स्थान पर बच्चों की अत्यधिक भीड़-भाड़ को रोककर, बच्चों को मां या फिर वयस्क बकरियों से अलग रखकर बाड़ों की नियमित व अच्छी तरह सफाई, नियमित अन्तराल पर बाड़ों में चूने का छिड़काव करके की जा सकती है.
रोकथाम में ही आवश्यकतानुसार दवा खिलाकर इस परजीवी के अंडों (ऊसिस्ट) की संख्या (लोड) को भी कम किया जा सकता है.
इस रोग की चिकित्सा के सल्फडाइमिडिन 100-200 मि.ग्रा./कि.ग्रा. शारीरिक भार, एम्प्रोलियम 10-20 मिली ग्राम प्रति किलो ग्राम रोजाना 5-6 दिन तक खिलाना चाहिए.
इसके अतिरिक्त टोलट्राजुशिल 10 मिली ग्राम प्रति किलो ग्राम वजन भार से 1 या 2 दिन देना चाहिए.
इस बीमारी से बकरियों की होने लगती है मौत, उत्पादन पर सबसे ज्यादा पड़ता है असर












