नई दिल्ली. मध्य प्रदेश के खंडवा शहर में गोशाला में गोवंश पालन से ना सिर्फ ग्राम पंचायत आत्मनिर्भर बनीं बल्कि उसके राजस्व में भी ग्रोथ हो रही है. गोवंश के गोबर से गोकाष्ठ का बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जा रहा है, वहीं इससे उत्पादित दूध की बिक्री कर गो.900शाला में गोवंश की संख्या में भी इजाफा किया जा रहा है. इतना ही नहीं यहां लगे बायोगैस प्लांट से स्कूल के विद्यार्थियों के लिए हर दिन खाना भी तैयार हो रहा है. खालवा ब्लाक की ग्राम पंचायत रोशनी, जिले की ऐसी पंचायत है जो आत्मनिर्भर बन दूसरों को संदेश भी दे रही है.
जानकारी के लिए बता दें कि गौशाला में देसी नस्ल की 320 व गिर नस्ल के 10 गोवंश हैं. जिनका सरंक्षण श्री राधे कृष्णा स्व सहायता समूह की महिलाओं द्वारा किया जा रहा है. गोशाला में प्रतिदिन 60 लीटर दूध, गाय के गोबर से गोकाष्ठ व बायोगैस तैयार की जा रही है. यही नहीं पंचायत द्वारा गोशाला के पास स्थित जमीन पर जैविक खेती भी की जा रही है. जिसे बेचकर पंचायत के राजस्व में इजाफा भी हो रहा है.
गाय के गोबर से गोकाष्ठ बना रहे
बता दें कि गोशाला में स्थित 330 गोवंश के गोबर से इन दिनों गोशाला में ही मशीनों से गोकाष्ठ तैयार किया जा रहा है.
पंचायत के उपयंत्री राठौड़ ने बताया बड़ी मात्रा में तैयार गोकाष्ठ को बाजार में बेचने की योजना बनाई जा रही है.
इसका उपयोग हवन, पूजन, होलिका दहन बंधूसिंह सहित अन्य कार्यों में भी किया जा सकता है.
वहीं गोशाला में तैयार हो रही गोबर गैस पास ही स्थित एकलव्य छात्रावास के 400 विद्यार्थियों के भोजन बनाने के लिए सप्लाई की जा रही है.
जबकि गोवंश से निकलने वाला 60 लीटर दूध भी छात्रावास के बच्चों को ही दिया जा रहा है. जिससे गोशाला को अतिरिक्त आय हो रही है.
गौशाला के पास चार एकड़ में बनाई गई पोषण वाटिका में जैविक सब्जियां लगाई है. जिसमें जैविक सब्जियां लगाई गई हैं.
यहां पर उगने वाली सब्जियों को हर दिन बाजार सहित छात्रावासों में पहुंचाया जा रहा है. यह भी पंचायत की आत्मनिर्भरता बढ़ा रही है.
निष्कर्ष
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश की सरकार दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए गोपालन को भी बढ़ावा देने का काम कर रही है. इस पंचायत की तरह अन्य लोग भी गोपालन करके इस तरह का फायदा उठा सकते हैं.












