नई दिल्ली. मछली पालन एक बढ़िया कमाई वाला काम है लेकिन इसमें सबसे बड़ी गलती तब होती है जब कोई नया व्यक्ति बिना सोचे समझे पैसा इन्वेस्ट कर देता है. यदि ऐसे में नुकसान हो गया तो फिर दोबारा मछली पालन करने की हिम्मत जुटाना मुश्किल हो जाता है. कई बार नए मछली पालक बिना तैयारी के ही तालाब खुदवाकर मछली पालन शुरू कर देते हैं. इसके लिए महंगे बीज ले लेते हैं और फिर जब नुकसान होता है तो दोबारा इस काम को नहीं करते हैं. ऐसी कई गलतियां हैं जो खास तौर पर नए मछली पालक से हो जाती है. जिसका खामियाजा उन्हें कई सालों तक झेलना पड़ता है.
मछली पालन में सबसे बड़ी गलती ये होती है कि लोग बिना पूरी जानकारी के दूसरों को देखकर इस काम को शुरू कर देते हैं. जबकि उन्हें तालाब की बनावट की समझ भी नहीं होती ना ही मछली की प्रजाति कौन सी होनी चाहिए इसकी जानकारी होती है. वहीं उन्हें दवा चारा के बारे में भी जानकारी नहीं होती है. नतीजे में फालतू खर्च की वजह से मछली पालन की लागत बढ़ जाती है और फिर जब नुकसान होता है तो मछली पालन का काम बंद करना पड़ता है.
कहां हो जाती है गलती
एक्सपर्ट का कहना है कि कई बार मछली पालक लोकल और कमजोर क्वालिटी के बीज जो छोटे ब्रूडर से बेचते हैं उनसे खरीद लेते हैं. जिसके चलते नुकसान होना तय है.
छोटे ब्रूडर मछली पालकों को कुपोषित बीज देते हैं और इससे मछलियों में मृत्यु दर दिखाई देती है. अगर ना भी दिखाई दे तो मछलियों की ग्रोथ सही से नहीं होती है.
इन नुकसानों से बचने के लिए सबसे पहले कम से कम 15 दिन की ट्रेनिंग या तो किसी अनुभवी किसान से लेनी चाहिए या कई सरकारी संस्थाएं हैं, वहां से भी ट्रेनिंग ली जा सकती है.
एक्सपर्ट का कहना है कि नए मछली पालकों को आधे या एक एकड़ के तालाब से मछली पालन की शुरुआत करना चाहिए. ताकि खर्च कम हो और इससे अच्छा अनुभव हासिल हो सके.
जब एक बार अनुभव हासिल हो जाए तब उसके बाद बड़े तालाब में मछली पालन किया जा सकता है और उससे अच्छी कमाई भी की जा सकती है.
निष्कर्ष
मछली पालन में छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है. वरना मछली पालन में नुकसान होने में देर नहीं लगती है.











