नई दिल्ली. मध्य प्रदेश सरकार के गठन को दो साल हो गए हैं. इस मौके पर पशुपालन एवं डेयरी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल ने अपने विभाग की उपलब्धियां गिनवाईं हैं. कहा है कि हमारी सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और पशुपालकों की इनकम बढ़ाने के लिए लगातार काम कर रही है. हमारी कोशिश है कि पशुपालन को आजीविका का मजबूत आधार बनाया जाए. कहा कि पिछले 2 वर्षों में लगातार प्रगति की है. हमने शासन की विभिन्न योजनाओं और कार्यकमों के माध्यम से समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक फायदा पहुंचाने के संकल्प के साथ काम किया है.
उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने गौवंश के संरक्षण और संवर्धन को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए प्रदेश में निराश्रित पशुओं के लिए नवीन गौशाला नीति बनाई है. बताते चलें कि राज्यमंत्री पटेल शनिवार को कुशाभाऊ ठाकरे सभा हॉल में पशुपालन और डेयरी विभाग की दो वर्ष की उपलब्धियों की जानकारी मीडिया प्रतिनिधियों से साझा कर रहे थे.
बढ़ेगा दूध स्टोरेज साथ ही प्रोसेसिंग
सरकार द्वारा सहकारी प्रणाली और सांची ब्रांड को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एमपी स्टेट को ओपरेटिव डेयरी फेडरेशन लिमिटेड तथा संबद्ध दूध संघों के संचालन एवं प्रबंधन के लिए मध्यप्रदेश शासन, एमपी स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन लिमिटेड एवं संबद्ध दुग्ध संघों तथा राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के मध्य होने वाले सहकार्यता अनुबंध पर सहमति दी गई.
पशुओं का नस्ल सुधार के लिए चल रहा ये अभियान
प्रदेश में पशुपालकों को समृद्ध करने के लिए पशुओं का नस्ल सुधार एक महत्वपूर्ण साधन है, इस वजह से हिरण्यगर्भा अभियान संचालित किया जा रहा है. परम्परागत सीमन डोज की जगह सॉर्टेड सेक्सड सीमन के ज्यादा से ज्यादा उपयोग हेतु जागरूक किया जा रहा ग्राम पंचायत स्तर पर लगभग 11500 हजार कृत्रिम गर्भाधान कार्यकर्ता (मैत्री) को प्रशिक्षित किया गया है.
इस योजना की हुई शुरुआत
मुख्यमंत्री डॉ. यादव की मंशा अनुसार देश के दुग्ध उत्पादन में प्रदेश की भागीदारी 09 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने के उददेश्य से अभिनव योजना डॉ. भीमराव अम्बेडकर कामधेनु योजना शुरू की गई है. आवेदन पर एक इकाई (25) दुधारू पशु) या एक से अधिक इकाई (अधिकतम 08 इकाईयों, 200 दुधारू पशु) लेने की पात्रता होगी.
दूध संपर्क अभियान
अभियान तीन चरणों में संचालित होना है. प्रथम चरण में 10 या अधिक गाय भैंस के पशुपालक, द्वितीय में 5 या अधिक के पशुपालक तथा तृतीय चरण में 5 से कम पशुसंख्या वाले पशुपालक सम्मिलित होंगे.












