नई दिल्ली. मछली पालन में तालाब के अंदर ऑक्सीजन का बेहद ही महत्व है. अगर तालाब में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है तो इससे मछलियों का दम घटने लगता है और उनकी ग्रोथ तेजी से कम हो जाती है. मछलियां तनाव में आ जाती हैं और बीमार पड़ने लगती हैं. कई बार मछलियों के शरीर पर लाल चकत्ते जैसी बीमारी भी हो जाती है. जब मछलियों में तनाव बढ़ता है तो वह फीड को भी सही से नहीं खा पाती हैं. इससे उनका विकास रुक जाता है. कई बार तो मछलियां ऑक्सीजन लेने के लिए तालाब से बाहर कूद जाती हैं. इससे भी उनकी मौत हो जाती है.
भारत सरकार के मत्स्य पालन विभाग (Department of Fisheries, Government of India) के एक्सपर्ट का कहना है कि ऑक्सीजन की कमी से मछलियों के लिए संकट बढ़ जाता है. तालाब का संतुलन भी तेजी के साथ बिगड़ जाता है. जिससे मछली पालन के काम में सिर्फ और सिर्फ नुकसान होता है.
क्या-क्या कारण हैं
सर्दियों में अगर आसमान पर बादल छाए रहते हैं और धूप नहीं रहती तब तालाब में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है. इसके अलावा बर्फ जमने से भी सतह पर हवा का संपर्क टूट जाता है. इससे भी ऑक्सीजन कम हो जाती है.
यदि तालाब में मछली का मल, बचा हुआ खाना और जालीय पौधे मर गए हैं तो इससे वो सड़ने लगते हैं. इस वजह से भी ऑक्सीजन तालाब में कम हो जाती है.
यदि आपने तालाब की क्षमता के मुकाबले ज्यादा मछलियों को पाल लिया है, तब भी ऑक्सीजन की कमी हो सकती है. जबकि इससे तालाब में वेस्ट भी ज्यादा बनता है.
तालाब की समय-समय पर सफाई होती ही रहना चाहिए. बहुत ज्यादा पौधे हो जाने से भी रात के समय में खासतौर पर ऑक्सीजन की कमी तालाब में हो सकती है.
कई बार खाद और अन्य दूषित पदार्थ भी अगर तालाब में ज्यादा हो जाता है तो इससे शैवाल और पौधों में वृद्धि होती है. जिससे ऑक्सीजन में कमी होती है.
निष्कर्ष
एक्सपर्ट का कहना है कि तालाब में ऑक्सीजन की कमी नहीं होने देना चाहिए. इससे मछली पालन में सिर्फ और सिर्फ नुकसान हाथ आएगा.












