नई दिल्ली. मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) तथा मध्य प्रदेश स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन के बीच एक अहम बैठक हुई. एनडीडीबी और सरकार के बीच सहकार्यता समझौते के प्रभावी संचालन के लिए राजय में गठित राज्य स्तरीय संचालन समिति की ये पहली बैठक आयोजित की गई थी. बैठक में समिति द्वारा संशोधित मध्य प्रदेश दूध विकास योजना को स्वीकृत किया गया. एनडीडीबी के सहयोग से सरकार साल 2029–30 तक 26 हजार गांवों तक डेयरी सहकारी कवरेज का विस्तार करेगी.
सरकार की मंशा है कि राज्य को डेयरी कैपिटल के रूप में विकसित किया जाए और राज्य में इसी कड़ी हर दिन 52 लाख किलोग्राम दूध संकलन, 35 लाख लीटर दूध की बिक्री तथा 63.3 लाख लीटर प्रतिदिन प्रोसेसिंग क्षमता के लक्ष्य के साथ गतिविधियां संचालित की जा रही हैं.
किसानों को फायदा पहुंचाने पर दिया जोर
संशोधित मध्य प्रदेश दुग्ध विकास योजना के अंतर्गत दूध खरीद में संभावित वृद्धि को देखते हुए, समिति ने एक अहम निर्णय लिया.
प्रदेश में दूध उत्पादन और प्रोसेसिंग गतिविधियों के विस्तार के लिए पब्लिक–प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तर्ज पे कार्य योजना बनाई जाए.
बैठक में सांची ब्रांड के अधिकतम विस्तार पर विशेष बल देते हुए यह निर्णय लिया गया कि सांची उत्पादों की ब्रांडिंग में गोवंश और गोपाल को सम्मिलित किया जाए. जिससे उपभोक्ताओं के साथ भावनात्मक जुड़ाव सुदृढ़ हो.
साथ ही, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में डेयरी टेक्नोलॉजी पर केंद्रित प्रशिक्षण एवं पाठ्यक्रम शुरू करने, दूध संकलन व्यवस्था की नियमित एवं मजबूत निगरानी की बात कही गई.
वहीं दूध खरीदी प्रक्रिया में पारदर्शिता तथा दूध उत्पादकों को समय-सीमा में भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए.
दुग्ध उत्पादकों को भुगतान के लिए 10 दिन का रोस्टर भी निर्धारित किया गया है. बैठक में मुख्यमंत्री जी द्वारा किसानों की आय बढ़ाने में दुग्ध उत्पादन की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया गया.
दूध विकास योजनाओ के प्रभावी तौर पर चलाने पे जोर दिया गया. जिससे अधिकतम फायदा किसानों तक पहुंचे.
बैठक में एनडीडीबी, मध्यप्रदेश स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन, राज्य शासन तथा पशुपालन एवं डेयरी विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे.












