Home पशुपालन Animal Husbandry: नस्ल सुधार, पशु स्वास्थ्य, टीकाकरण और टैगिंग पर फोकस करेगी एमपी सरकार
पशुपालन

Animal Husbandry: नस्ल सुधार, पशु स्वास्थ्य, टीकाकरण और टैगिंग पर फोकस करेगी एमपी सरकार

दुधारू पशुओं के बयाने के संकेत में सामान्यतया गर्भनाल या जेर का निष्कासन ब्याने के तीन से 8 घंटे बाद हो जाता है.
गाय-भैंस की प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. मध्य प्रदेश की राज्य सरकार राज्य को नंबर वन दूध उत्पादक राज्य बनाने की चाह रखती है. इसी क्रम में राज्य में कई काम हो रहे हैं. राज्य में डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना की शुरुआत की गई है. इसके अलावा भी छोटे स्तर पर डेयरी फार्मिंग शुरू करनी चाहत रखने वाले वाले किसानों को सरकार मुर्रा भैंस की खरीद पर आर्थिक मदद दे रही है. गौरतलब है कि राज्य में पशुओं से बेहतर प्रोडक्शन लेने के लिए सरकार नस्ल सुधार, पशु स्वास्थ्य टीकाकरण एवं टैगिंग जैसे कामों में ज्यादा दिचलस्पी दिखा रही है.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि राज्य 20वीं पशु संगणना के अनुसार गौंवंशीय पशु के के मामले में तीसरा स्थाना रखता है. वहीं भैंसवंशीय पशु की संख्या भी यहां ज्यादा है. इन्हीं पशुओं से राज्य को मिल्क कैपिटल बनाने की तैयारी सरकार कर रही है. वहीं अच्छी नस्ल के पशु पैदा हों, इसको लेकर भी काम हो रहे हैं.

कितना होता है दूध उत्पादन
बता दें कि प्रदेश में कुल 187.52 लाख गौवंशीय पशु हैं, जो देश में तीसरे स्थान पर है. प्रदेश में देश के कुल गौवंश का 9.73 प्रतिशत हिस्सा है.

इसी तरह से प्रदेश में 103.07 लाख भैंसवंशीय पशु हैं, जो देश में चौथे स्थान पर है और देश के कुल भैंसवंशीय पशु के मुकाबले 9.38 प्रतिशत मध्य प्रदेश में है.

प्रदेश के दूध उत्पादन पर गौर करें तो 22.60 मिलियन मीट्रिक टन है, जिसमें प्रदेश का देश में तीसरा स्थान है.

बीरधारा ग्राम योजना का क्रियान्वयन
ऐसा माना जा रहा है कि पशुओं की प्रोडक्टिविटी क्षमता कम है. जिसे बढ़ाने की जरूरत है और सरकार की ओर इस दिशा में काम भी किए जा रहे हैं.

प्रदेश के कई गांवों में संस्थागत और व्यक्तिगत प्रयासों से नस्ल सुधार कार्यक्रम प्रभावी रूप से चलाए जा रहे हैं.

जिससे पशुपालक उन्नत पशुपालन कर ज्यादा दूध उत्पादन कर रहे हैं. ऐसे गांवों को आदर्श उदहारण के रूप में प्रस्तुत करने की योजना है.

ज्यादा दूध उत्पादन करने वाले गांवों को आडियल गांव बनाने के साथ अन्य गांवों के लोगों को प्रेरित करने के उद्देश्य से कोरधारा ग्राम योजना लागू की जाएगी.

योजना को तीन वर्षों में चरणबद्ध रूप से चलाया जाएगा. इसके तहत जिलों के सभी ग्रामों को पशुपालन के स्तर उन्नत पशुपालकों को उपलब्धता नस्ल सुधार, पशु स्वास्थ्य टीकाकरण एवं टैगिंग की जाएगी.

निष्कर्ष
वहीं किसानों को पशु स्वस्थ्य पशुपोषण एवं नस्ल सुधार की जानकारी देने के लिए एक अभियान चलाया जा रहा है. ताकि लोग पशु की सेहत के प्रति जागरुक हों और ज्यादा से ज्यादा दूध उत्पादन ले सकें.

Written by
Livestock Animal News Team

Livestock Animal News is India’s premier livestock awareness portal dedicated to reliable and timely information.Every news article is thoroughly verified and curated by highly experienced authors and industry experts.

Related Articles

कीड़े बकरे के पेट में हो जाएं तो उसकी ग्रोथ रुकना तय है.
पशुपालन

Goat: सांस लेने में तकलीफ है, बकरी कुछ खा नहीं रही है तो उसे है अफरा

नई दिल्ली. बकरी पालन करने वाले पशुपालक इससे अच्छी कमाई कर लेते...

पशुपालन

Cow: यूपी में हजारों गो आश्रय स्थल बनेंगे ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर प्रोडक्शन सेंटर, युवाओं को मिलेगा रोजगार

नई दिल्ली. उत्तर प्रदेश अब गोसंरक्षण, प्राकृतिक खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के...

पशुपालन

Animal Husbandry: पशुपालन में वैज्ञानिक प्रगति और पशु कल्याण के बीच संतुलन बनाने की जरूरत

नई दिल्ली. भारत सरकार के पशुपालन और डेयरी विभाग (डीएएचडी) के तहत...