Home मछली पालन Fisheries: ड़ेढ़ से दो लाख रुपए कमाने वाले मछली पालकों की पंगेशियस मछली पालने से इनकम हुई डबल
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Fisheries: ड़ेढ़ से दो लाख रुपए कमाने वाले मछली पालकों की पंगेशियस मछली पालने से इनकम हुई डबल

जब पूरी जानकारी होगी तो नुकसान का चांसेज कम होगा और इससे मुनाफा ज्यादा होगा. इसलिए अगर आप मछली पालन करना चाहते हैं तो जरूरी है कि मछली को खाना खिलाया जाता है उसकी जानकारी तो कम से कम कर लें.
प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. बिहार राज्य ने पिछले कुछ सालों में मत्यि​की की और जलीय कृषि में मील का पत्थर तय कर दिया.. इस राज्य में एक ओर मछली उत्पादन बढ़ा है तो वहीं दूसरी ओर मछली पालन से जुड़ने वाले किसानों की इनकम में भी जबरदस्त इजाफा हुआ है. इसके चलते नए-नए लोग मछली पालन से जुड़े हैं और राज्य में लगातार मछली उत्पादन बढ़ रहा है. डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग (Dairy Fisheries and Animal Resources Department) के अफसरों का कहना है कि इस विभाग की तरफ से राज्य में पंगेशियस मछली पालन को कैसे फायदेमंद बनाया जाए, इसको लेकर काफी काम हुए हैं.

विभाग की ओर से ट्रेनिंग प्रोग्राम भी चलाया गया है. जिसका फायदा मछली पालन से जुड़े लोगों को मिला है. पहले लोग जो मछली पालन से कम मुनाफा कमाते थे पंगेशियस मछली पालन करने लगे तो उनकी आय में अच्छी खासी ग्रोथ हुई है. जिसके चलते बहुत से किसानों ने पंगेशियस मछली का पालन शुरू कर दिया है.

यहां जानें पंगेशियस मछली की खासियत
पंगेशियस मछली जो आमतौर पर बिहार में पंगास या बासा मछली के नाम से जानी जाती है. इसका विकास बेहद तेजी के साथ होता है.

इस मछली की सबसे बड़ी खासियत ये है कि ये कम ऑक्सीजन वाले तालाब में भी बेहद ही आसानी के साथ पल जाती है. जबकि अन्य मछलियों को अधिक ऑक्सीजन की जरूरत होती है.

आमतौर पर ठंड के समय में ऑक्सीजन की कमी तालाब में हो जाती है. इससे अन्य मछलियों के मुकाबले पंगेशियस मछली ज्यादा आसानी से तालाब में पल पाती है.

वहीं इस मछली की दूसरी खासियत यह भी है कि इसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहद ही अच्छी होती है. इसलिए ये मछलियां जल्दी बीमार नहीं पड़ती हैं.

जब ये मछलियां बीमार नहीं पड़ती तो ऐसे में मछली पालकों को इन मछलियों को पालकर नुकसान भी बहुत कम होता है. जिससे फायदा बढ़ जाता है.

अपनी इन्हीं विशेषताओं के कारण इस वक्त ये बिहार के मछली पालकों की पहली पसंद बन चुकी है.

बिहार की राजधानी पटना जिले के बेलछी निवासी मछली पालक विवेक कुमार का कहना है कि पहले हम लोग इंडियन मेजर कार्प मछलियां पालते थे.

जब विभाग की ट्रेनिंग के बारे में पता चला तो उससे जुड़े और ये पता चला कि पंगेशियस मछली कम जगह में ज्यादा उत्पादन देती है.

उन्होंने बताया कि आईएमसी मछली पालने पर जहां डेढ़ से दो लाख की ही कमाई होती थी. वहीं पंगेशियस मछली को पालने से इनकम 3 से 4 लाख रुपए हो गई है.

वहीं पटना जिले के ही मसौढ़ी गांव के यशवंत कुमार का कहना है कि रोहू कतला को तैयार होने में काफी समय लगता था लेकिन पंगेशियस जल्दी तैयार हो जाती है.

आमतौर पर ये मछली 5 से 6 महीने में तैयार हो जाती है. इस वजह से इसका ही कल्चर शुरू किया है. उन्होंने बताया कि 4 से 5 लाख रुपये एक सीजन में आसानी से आमदनी हो जाती है.

उन्होंने बताया कि पहले लीज पर जमीन लेकर तालाब को खुदवाकर ये काम कर रहे थे लेकिन अच्छी इनकम हो गई है. इसलिए अपनी जमीन लेकर इसमें काम को करेंगे.

निष्कर्ष
पंगेशियस मछली पालन से हो रहे फायदे की वजह से यशवंत जैसे कई किसान खुद का तालाब बनवाकर मछली पालन करने की सोच रहे हैं. इसके अलावा वो दूसरे किसानों को भी इस काम से जोड़ रहे हैं और कई लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं.

Written by
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