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Fisheries: मछुआरों व मछली बेचने वालों की इनकम बढ़ाने के लिए सरकार दे रही है आधुनिक किट

Deep Sea fishing vessels, Ice Plants, Livelihood & Nutritional Support have been implemented in Kakinada District.
प्रतीकात्मक तस्वीर।

नई दिल्ली. मछली पालन भी एक ऐसा काम है, जिसको करके कृषि पर आधारित रहने वाले किसान अच्छी कमाई कर सकते हैं. यही वजह है कि सरकारें भी मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए बुनियादी ढांचों को मजबूत करने का काम कर रही हैं. ताकि फिशरीज सेक्टर से जुड़े हर तबके के लोगों को इसका फायदा मिल सके. बिहार सरकार भी इस कड़ी में कई काम कर रही है. सरकार की तरफ से हाल ही में बताया गया है कि राज्य में फिशरीज सेक्टर को मजबूत करने के लिए आधुनिक उपकरणों के इस्तेमाल से मछुआरों व मछली बेचने वालों की इनकम में इजाफा करने पर जोर दिया जा रहा है.

मुख्यमंत्री मत्स्य विपणन एवं मुख्यमंत्री मछुआ कल्याण योजना के तहत मछुआरों एवं मत्स्य विक्रेताओं के बीच मत्स्य बिक्री किट और आइस बॉक्स युक्त श्री-व्हीलर का वितरण किया गया है. बेगुसराय में पिछले दिनों जिला मत्स्य कार्यालय की ओर से सामुदायिक भवन बाघा में इसको लेकर कार्यक्रम का आयोजन किया गया था. जिसमें बिहार सरकार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन मंत्री सुरेन्द्र मेहता द्वारा फिशरीज सेक्टर से जुड़े लोगों को किट का वितरण किया गया.

जानें क्या-क्या दिया गया
इस दौरान योजना के तहत कुल 170 मत्स्य बिक्री किट एवं 10 आइस बॉक्स युक्त श्री-व्हीलर लाभार्थियों के बीच वितरित किया गया.

इस मौके पर मंत्री ने कहा कि इन आधुनिक उपकरणों के उपयोग से मछली की गुणवत्ता बनाए रखने में सहायता मिलेगी. इससे तथा मछुआरों एवं मत्स्य विक्रेताओं की आय में जबरदस्त वृद्धि होगी.

मालूम हो कि मत्स्य विपणन किट में सड़क किनारे एवं बाजारों में मछली बिक्री करने वाले विक्रेताओं के लिए छतरी और फेंका जाल दिया गया.

वहीं स्टेनलेस स्टील कटर, आइस बॉक्स तथा तराजू जैसे जरूरी उपकरणों को भी इसमें शामिल किया गया था.

वहीं, थ्री-व्हीलर के माध्यम से मछली के सुरक्षित परिवहन एवं ताजी मछली की उपलब्धता सुनिश्चित करने का उद्देश्य रखा गया है.

इस अवसर पर जिला मत्स्य पदाधिकारी रणजीत कुमार ने कहा कि ग्रामीण मत्स्य बिक्री किट की इकाई लागत 19 हजार रुपए है.

वहीं शहरी मत्स्य विपणन किट की इकाई लागत 25 हजार रुपए निर्धारित है. जिस पर 70 प्रतिशत तक का सरकारी अनुदान दिया जा रहा है.

वहीं, आइस बॉक्स सहित श्री-व्हीलर की इकाई लागत 3 लाख रुपए है, जिस पर 50 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान है.

कार्यक्रम में उप मत्स्य निदेशक, मुंगेर श्री शैलेंद्र कुमार, जिला पशुपालन पदाधिकारी डॉ. राकेश कुमार कुमुद, जिला गव्य विकास पदाधिकारी श्री आनंद कुमार सहित अन्य मौजूद थे.

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