नई दिल्ली. बिहार की सरकार ने डेयरी को गांवों की इनकम का मजबूत आधार बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने घोषणा की है कि अगले दो वर्षों के भीतर राज्य के प्रत्येक गांव में दुग्ध उत्पादन समिति और हर पंचायत में सुधा दुग्ध बिक्री केंद्र खोले जायेंगे. सरकार का मानना है कि इससे पशुपालकों को दूध का उचित मूल्य मिलेगा और डेयरी उद्योग का संगठित विकास होगा. राज्य में कुल 39,073 गांव हैं, जिनमें से अब तक 25,593 गांवों में दुग्ध उत्पादन समितियों का गठन किया जा चुका है.
सरकार ने बताया है कि बाकी बचे 13 हजार 480 गांवों को भी अगले दो वर्षों के भीतर डेयरी नेटवर्क से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है. पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग को आवश्यक निर्देश दे दिये गये हैं. बताया गया है कि अधिकारियों को समय से काम करने के निर्देश दिए गए हैं. बता दें कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पिछले दिनों ट्वीट कर यह जानकारी दी.
सीधे बाजार तक पहुंच हो जाएगी.
सरकार की तरफ से बताया गया है कि गांव स्तर पर दुग्ध संग्रह की व्यवस्था मजबूत होने से दूध की बर्बादी रुकेगी.
बिचौलियों की भूमिका घटेगी और पशुपालकों को उनके उत्पाद का पारदर्शी और लाभकारी मूल्य मिल सकेगा.
इससे राज्य में दूध की उपलब्धता बढ़ेगी और डेयरी व्यवसाय को नया प्रोत्साहन मिलेगा.
पंचायत स्तर पर खुलने वाले नये सुधा दुग्ध बिक्री केंद्रों को मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना से लाभान्वित जीविका दीदियों को प्राथमिकता दी जाएगी.
सरकार की तरफ से बताया गया है कि ये जीविका दीदियों को प्राथमिकता के आधार पर आवंटित किया जायेगा.
इससे ग्रामीण क्षेत्रों में महिला उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा और महिलाओं को स्थानीय स्तर पर स्थायी आय का साधन मिलेगा.
मुख्यमंत्री ने बताया कि डेयरी उद्योग को सशक्त बनाने की यह पहल सात निश्चय-3 के तीसरे निश्चय’ कृषि में प्रगति, प्रदेश में समृद्धि’ का अहम हिस्सा है.
इसके साथ ही वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट भाषण में भी इस योजना का स्पष्ट प्रावधान किया गया है.
निष्कर्ष
सरकार की मंशा है कि डेयरी सेक्टर से जोड़कर कृषि पर निर्भर रहने वाले किसानों की इनकम को बढ़ाकर दोगुना कर दिया जाए. यदि किसान कृषि के अलावा पशुपालन भी करते हैं तो दूध की बिक्री से सीधे तौर पर उनकी इनकम बढ़ जाएगी. इससे ग्रामीण अर्थवयवस्था भी मजबूत होगी और किसानों को इसका फायदा भी मिलेगा. कृषि के अलावा एक और काम होने से कभी कृषि में नुकसान होता है पशुपालन से वो अपने नुकसान की भरपाई कर लेंगे.












