Home मछली पालन Fish Farming: इस महीने तालाब में डालें चूने का घोल, मछलियों का बीज भी इस माह डाल सकते हैं
मछली पालन

Fish Farming: इस महीने तालाब में डालें चूने का घोल, मछलियों का बीज भी इस माह डाल सकते हैं

तालाब में खाद का अच्छे उपयोग के लिए लगभग एक सप्ताह के पहले 250 से 300 ग्राम प्रति हेक्टेयर बिना बुझा चूना डालने की सलाह एक्सपर्ट देते हैं.
तालाब में मछली निकालते मछली पालक

नई दिल्ली. मछली पालन में कई बातों का ध्यान देना चाहिए. खासतौर पर मौसम के बदलते ही मछली पालन के काम में भी कुछ बदलाव किया जाता है. जिसका पता होना हर एक मछली पालक के लिए जरूरी है. बिहार सरकार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग (Dairy Fisheries and Animal Resources Department) के एक्सपर्ट की ओर से लाइव स्टॉक एनिमल न्यूज (Livestock Animal News) की ओर से मार्च के महीने में मछली पालकों को किन बातों पर ध्यान देना चाहिए, उसके बारे में अहम जानकारी दी गई है.

एक्सपर्ट का कहना है कि मार्च के पहले हफ्ते में पूर्व संचित मछलियों की निकासी कर नये फसल के लिए तालाब की तैयारी कर मत्स्य बीज संचयन का कार्य प्रारंभ करें. मछलियां छोटी हों तो जाल चलाकर मछलियों के स्वास्थ्य, संख्या, आकार आदि की जांच कर लें और मत्स्य बीज के कुल शरीर भार के अनुपात में नियमित आहार देना प्रारंभ कर दें.

इन बातों का भी खास ध्यान रखें
तालाब में नियमित रुप से 15 दिन के अंतराल पर पीएच मान के अनुसार 10-15 किलोग्राम चूने का छिड़काव घोल कर प्रति एकड़ की दर से करें.

बदली (बरसात) के दिनों के दौरान घुलनशील ऑक्सीजन की कमी हो सकती है, इसलिए ऐसी स्थिति में ऐयरेंशन या जल पुनर्चक्रण की व्यवस्था करनी चाहिए.

ऐसे मौसम में मछलियों को बीमारी से बचाने के लिए पोटाशियम परमेग्नेट 400 ग्राम प्रति एकड़ प्रति मीटर पानी की गहराई की दर से प्रयोग करना चाहिए.

एक्सपर्ट का कहना है कि नए तालाब में पुरानी मिट्टी को सुखा देना चाहिए और 10 से 15 दिन छोड़ देना चाहिए. ताकि हानिकारक बैक्टीरिया खत्म हो जाएं और इसके लिए चूने का छिड़काव कर सकते हैं.

इसके बाद सड़ी हुई गोबर की खाद का इस्तेमाल तालाब में करना चाहिए. तालाब के पानी में लगातार नमी और सही गहराई बनाए रखना जरूरी होता है. गर्मी बढ़ने पर जलस्तर कम न होने दें

अगर आप इस महीने मछलियों का बीज डालना चाहते हैं तो पंगेशियस, ग्रास कार्प, रोहू जैसी उन्नत नस्लों का चयन कर सकते हैं.

मछलियों को प्रोटीन युक्त खाना दें. इसमें गेहूं, मक्का, सोयाबीन, चावल की भूसी और सरसों की खली आदि को शामिल कर सकते हैं.

इस महीने में तापमान बढ़ता है. इसलिए तालाब में ऑक्सीजन की कमी नहीं होने देना चाहिए. नियमित रूप से पानी बदलते रहना चाहिए.

निष्कर्ष
एक्सपर्ट का ये भी कहना है कि अगर इन बातों भी ध्यान रख लिया जाए तो मछलियों की बेहतर ग्रोथ ले सकते हैं. इससे मछली पालन में फायदा बढ़ जाएगा.

Written by
Livestock Animal News Team

Livestock Animal News is India’s premier livestock awareness portal dedicated to reliable and timely information.Every news article is thoroughly verified and curated by highly experienced authors and industry experts.

Related Articles

The State-wise number of coastal fishermen villages for development as Climate Resilient Coastal Fishermen Villages are envisaged in proportion to the total number of coastal fishermen villages in the State and at present
मछली पालनसरकारी स्की‍म

Fisheries: जलीय कृषि बीमा से मछली पालन में नुकसान की होती भरपाई

नई दिल्ली. जलीय कृषि बीमा यानि एक्वाकल्चर इंश्योरेंस एक तरह की वित्तीय...

shrimp farming in india
मछली पालन

Seafood Export: चीन और यूरोपीय संघ के सीफूड निर्यात मूल में 22 और 37 फीसद की बढ़ोतरी

नई दिल्ली. देश में सीफूड एक्सपोर्ट (Seafood Export) लगातार बढ़ रहा है....

shrimp farming problems
मछली पालन

Fisheries: टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने से भीमावरम फिशरीज क्लस्टर होगा मजबूत

नई दिल्ली. नेशनल फिशरीज डेवलपमेंट बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. बिजय...