नई दिल्ली. बीमार पशुओं का वक्त पर इलाज हो और पशुओं की बीमारियों की वजह से पशुपालकों को नुकसान न हो, इसके लिए सरकार की तरफ पशु एंबुलेंस सेवा की शुरुआत की गई है. इसका फायदा भी मिल रहा है. बिहाार के डंडारी प्रखंड क्षेत्र के बांक पंचायत स्थित बांक गांव में सरकार द्वारा संचालित चलंत पशु एंबुलेंस सेवा 1962 एक बार फिर पशुपालकों के लिए मददगार साबित हुई है. इसी कड़ी में बांक गांव निवासी सह पंचायत के मुखिया अमरजीत सहनी की पालतू गाय के थन में गंभीर समस्या हो गई थी, जिससे दूध निकलना बंद हो गया था. स्थिति को गंभीर से देखते हुए अमरजीत सहनी ने तुरंत 1962 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल कर चलंत पशु एंबुलेंस सेवा की सहायता मांगी.
सूचना मिलते ही पशु चिकित्सा विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई. चिकित्सकों ने तत्परता से गाय का उपचार शुरू किया. समय पर इलाज मिलने से गाय के थन की स्थिति में सुधार हुआ, जिससे पशुपालक ने राहत की सांस ली. इस दौरान जिला कोऑर्डिनेटर दिलीप कुमार, पशु चिकित्सक डॉ. नवीन कुमार, पारा वेट विजय कुमार विजेता तथा एंबुलेंस संचालक सोनू कुमार मौजूद रहे. चिकित्सकों की टीम ने पूरी गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ इलाज किया और पशुपालक को आगे की देखभाल के लिए आवश्यक सुझाव भी दिए.
बीमारी को न करें नजरअंदाज
मौके पर मौजूद पशु चिकित्सक डॉ. नवीन कुमार ने ग्रामीणों और पशुपालकों को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार द्वारा अब पशु चिकित्सा सेवाओं को पहले से अधिक सुलभ और प्रभावी बनाया गया है.
उन्होंने पशुपालकों से अपील किया कि वे इन सरकारी सुविधाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और पशुओं की बीमारी को नजर अंदाज न करें.
उन्होंने बताया कि 1962 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल कर पशुपालक अपने पशु का नंबर पंजीकरण करा सकते हैं.
सुबह 8:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक पंजीकरण के बाद पशु चिकित्सक सीधे पशुपालक के घर पहुंचकर पशु का इलाज करते हैं, जिससे समय और पैसे दोनों की बचत होती है.
यह सुविधा खासकर ग्रामीण क्षेत्रों के लिए बेहद लाभकारी साबित हो रही है. डॉ. कुमार ने कहा कि सरकार की यह योजना तभी सफल होगी जब पशुपालक जागरूक होंगे.
वो बीमार पशुओं के इलाज के लिए समय पर कदम उठाएंगे. सही समय पर इलाज मिलने से पशुओं की जान बचाई जा सकी है.
कहा कि इससे पशुपालकों को आर्थिक नुकसान से भी बचाया जा सकता है. इस घटना के बाद गांव के अन्य पशुपालकों में भी चलंत पशु एंबुलेंस सेवा को लेकर सकारात्मक संदेश गया है.
निष्कर्ष
ग्रामीणों ने सरकार की इस पहल की सराहना कर रहे हैं. कह रहें कि ऐसी सेवाएं ग्रामीण पशुपालकों के लिए बेहद उपयोगी हैं और इससे पशुधन संरक्षण को और मजबूती मिलेगी.












