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Animal News: बिहार में 22 लाख पशुओं का एमवीयू के जरिए हुआ इलाज

अप्रैल महीने में भैंसे हीट में आती हैं और यह मौसम उनके गर्भाधान के लिए सही है. लेकिन इस बार अप्रैल के महीने में गर्मी अधिक है. ऐसे में गर्भाधान में प्रॉब्लम आ सकती है.
प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. बिहार ने पशुओं को चिकित्सा सेवा मुहैया कराने में बड़ी उपलब्धि हासिल की है. वित्तीय वर्ष 2025-26 में मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों के माध्यम से राज्य भर में 22 लाख 58 हजार 480 पशु चिकित्सा एवं प्रचार-प्रसार संबंधी कार्य किए हैं. आत्मनिर्भर बिहार के सात निश्चय 2 के तहत पशुपालकों के द्वार पर पशु चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है. डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग द्वारा प्रत्येक प्रखंड में मोबाइल पशु चिकित्सा इकाई संचालित की जा रही है. विभाग का दावा है कि राज्य के पशु चिकित्सालयों में 55 लाख 55 हजार 340 पशुओं को चिकित्सा सेवाएं गई हैं.

इतना ही नहीं, राज्य सरकार पशु स्वास्थ्य की योजना के तहत बधियाकरण एवं पैथोलाजिकल जांच की सुविधा भी उपलब्ध करा रही है. जबकि गलाघोंटू एवं लंगड़ी रोग के विरुद्ध कुल एक करोड़ 85 लाख 71 हजार 574 पशुओं को टीका लगाया गया है. वहीं, ब्रुसेलोसिस रोग के खिलाफ 16 लाख 40 हजार 170 पशुओं एवं लम्पी त्वचा रोग के विरुद्ध कुल एक करोड़ 21 लाख 89 हजार 147 पशुओं का टीकाकरण किया गया है.

वैक्सीन भी लगाई जा रही है
इस दौरान पशु स्वास्थ्य को बेहतर करने के लिए विभिन्न टीकाकरण कार्यक्रमों के जरिए करीब सात करोड़ टीके लगाए गए हैं.

खुरपका-मुंहपका रोग के विरुद्ध दो चरणों में टीकाकरण से कुल 3 करोड़ 66 लाख 37 हजार 285 पशुओं का टीकाकरण किया गया है. सरकार की इस सुविधा से बीमार पशुओं के स्वास्थ्य में अब काफी सुधार हुआ है.

जगह-जगह मोबाइल वेटरनरी यूनिट (एमवीयू) की टीम ने ग्रामीणों की सूचना पर लगातार गांवों में शिविर लगाकर पशुओं का इलाज कर रही है. जिससे पशुपालकों ने राहत की सांस ली है.

बीते शुक्रवार रजौली में टीम ने 37 बीमार बकरियों का उपचार किया था. शनिवार को जब एमवीयू की टीम टीभीओ रजौली के साथ पुनः गांव पहुंची.

यहां पहले से उपचारित सभी पशुओं की स्थिति बेहतर पायी गयी. इसके बाद टीम ने 8 पशुपालकों की 17 अन्य नई बीमार बकरियों का भी इलाज किया.

पशुपालकों को विभाग की ओर से निःशुल्क दवाएं भी वितरित की गयीं. टीवीओ ने बताया कि मौसम में बदलाव के कारण पशुओं में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है.

उन्होंने पशुपालकों को पशु आवास में साफ-सफाई रखने और बीमारी के लक्षण दिखते ही तुरंत सूचना देने की सलाह दी.

पशुपालक रामविलास यादव ने बताया कि समय पर इलाज मिलने से उनकी बकरियों ने अब चारा खाना शुरू कर दिया है.

विभाग ने स्पष्ट किया कि एमवीयू टीम लगातार क्षेत्र में भ्रमण कर रही है ताकि हर पशुपालक तक चिकित्सा सुविधा पहुंच सके.

Written by
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