नई दिल्ली. भारत मंडपम में आयोजित अनुगा फ़ूडटेक इंडिया डेयरी 2026 के दौरान, एक CEO राउंडटेबल का आयोजन किया गया. जहां NDDB के चेयरमैन डॉ. मीनेश सी. शाह ने इसे ‘विकसित भारत 2027’ के व्यापक राष्ट्रीय दृष्टिकोण से जोड़ा. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस दृष्टिकोण को साकार करने के लिए ग्रामीण भारत—विशेष रूप से डेयरी किसानों—को मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था में लाना जरूरी है, ताकि वे देश के विकास में सार्थक योगदान दे सकें. उन्होंने बताया कि जहां एक ओर भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, वहीं दूसरी ओर इसकी लगभग 60-65 फीसद ग्रामीण आबादी का आर्थिक योगदान में प्रतिनिधित्व अभी भी काफी कम है.
डॉ. शाह ने डेयरी क्षेत्र को समावेशी विकास का एक शक्तिशाली माध्यम बताया, और इस बात पर जोर दिया कि बाजार तक सुनिश्चित पहुंच ही इसकी सफलता की सबसे अहम कुंजी है. झारखंड और महाराष्ट्र जैसे क्षेत्रों में किए गए प्रयासों का उदाहरण देते हुए, उन्होंने समझाया कि किस तरह दूध खरीद के लिए जरूरी बुनियादी ढांचे और उचित मूल्य निर्धारण व्यवस्था की मौजूदगी किसानों को डेयरी क्षेत्र में निवेश करने के लिए तुरंत प्रोत्साहित करती है, जिससे दूध का उत्पादन बढ़ता है और किसानों की आय में भी वृद्धि होती है.
बहुत से गांवों में दूध खरीद की संगठित व्यवस्था उपलब्ध नहीं
उन्होंने सरकार की विभिन्न योजनाओं-जैसे ‘पशुपालन बुनियादी ढांचा विकास कोष’ (AHIDF) योजना—का भी जिक्र किया.
यह योजना डेयरी प्रोसेसिंग, उत्पादों के मूल्य-संवर्धन (value addition) और पशुपालन से जुड़े बुनियादी ढांचे में निवेश को बढ़ावा देती है. जिससे पूरी मूल्य-श्रृंखला (value chain) और बाजार तक पहुंच और भी मजबूत होती है.
चेयरमैन ने यह भी बताया कि आज भी बड़ी संख्या में ऐसे गांव हैं जहां दूध खरीद की संगठित व्यवस्था उपलब्ध नहीं है.
यह स्थिति इस क्षेत्र में विकास की एक बहुत बड़ी और अब तक अनछुई संभावना को दर्शाती है.
उन्होंने ‘दोहरे दृष्टिकोण’ की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि हमें एक ओर जहां इस क्षेत्र का विस्तार करना है, वहीं दूसरी ओर वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर इसकी उत्पादकता को भी बढ़ाना होगा.
उन्होंने बताया कि पशु प्रजनन से जुड़ी आधुनिक तकनीकों—जैसे ‘सेक्स-सॉर्टेड सीमेन’ और IVF—के साथ-साथ पशुओं के बेहतर स्वास्थ्य और पोषण पर ध्यान देना, दूध का उत्पादन बढ़ाने के लिए बेहद जरूरी है.
डॉ. शाह ने ‘राष्ट्रीय गोकुल मिशन’ (RGM) का भी ज़िक्र किया. यह पशुपालन और डेयरी विभाग, FAHD मंत्रालय के तहत सरकार की एक पहल है.
इसका मुख्य उद्देश्य देसी नस्लों का विकास और संरक्षण करना, पशुओं की आबादी का आनुवंशिक सुधार करना, और दूध उत्पादन व उत्पादकता को बढ़ाना है.
उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि उपभोक्ताओं को अच्छी गुणवत्ता वाला पोषण देने में डेयरी क्षेत्र की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जाएगी.
आय बढ़ने के साथ-साथ, लोगों की खान-पान की पसंद भी कार्बोहाइड्रेट से हटकर प्रोटीन की ओर बढ़ रही है.
भारत की ज़्यादातर आबादी शाकाहारी (दूध-आधारित) है, इसलिए उनके लिए दूध और दूध से बने उत्पाद प्रोटीन का एक मुख्य स्रोत बने रहेंगे.











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