नई दिल्ली. बहुत से पशुपालक भाई पशु की ईयर टैगिंग कराने से कतराते हैं. उनके मन में कई सारे नकारात्मक विचार इसको लेकर होते हैं. इससे वो ईयर टैगिंग नहीं कराते हैं. जबकि एक्सपर्ट का कहना है कि इसके कई फायदे हैं. यदि आप पशु की टैगिंग नहीं करवाते हैं तो सिर्फ नुकसान होता है. एक्सपर्ट के मुताबिक यदि आप पशुओं की ईयर टैगिंग कराते हैं तो इससे पशुओं को एक यूनिक पहचान मिलती है. मान लीजिए आपके पास 20 गाय हैं तो उनकी पहचान मुश्किल होती है. क्योंकि एक बार जब दुधारू गाय आपस में मिल जाए तो उनकी पहचान नहीं हो पाती है.
वहीं टैगिंग की वजह से ये भ्रम खत्म हो जाता है और हर पशु को सरकारी रिकॉर्ड से जोड़ा जा सकता है. जबकि सरकारी रिकॉर्ड के लिए नंबर जरूरी होता है. इसका एक फायदा ये भी है कि स्वास्थ्य प्रबंधन भी आसानी से किया जा सकता है. जब हर पशु के कान में टैग लगा होता है तो उसका पूरा मेडिकल इतिहास एक जगह पर सुरक्षित रहता है. इससे यह पता चल जाता है कि किस पशु को कब टीका लगा है. कौन कितनी बार बीमार हुआ है. दूध उत्पादन कितना है. गर्भधारण की तारीख आदि जानकारी आदि इस टैगिंग के जरिए मिल जाती है.
कई योजनाओं का फायदा नहीं मिलता है
असल में ये सारी जानकारी पुशधन एप में दर्ज हो जाती है. पशुधन एप सरकार का आधिकारिक एप है. इसे इस्तेमाल करना भी बेहद आसान है और ये हिंदी सहित 12 भाषा में उपलब्ध है.
इस मोबाइल एप के जरिए पशु का सारा रिकॉर्ड सामने आ जाता है. यानी सारी जानकारी फोन पर उपलब्ध हो जाती है.
आपको बता दें कि बिना टैगिंग न होने से कई योजनाओं का फायदा नहीं मिलता है. जबकि ईयर टैगिंग होती है तो योजनाओं का फायदा मिलता है.
इससे पशुधन बीमा, स्वास्थ्य, नस्ल सुधार कार्यक्रम, जनगणना रिकॉर्ड आदि की जानकारी भी इसमें दर्ज होती है. सरकार इसे सही भी मानती है.
वहीं टैग नंबर पशु की पहचान पक्की कर देता है. इससे पशु अगर चोरी हो जाता है तो उसे भी आसानी से ढूंढा जा सकता है.
टैग लगाने में पशु को ज्यादा दर्द भी नहीं होता है. जिस तरह से कान छिदवाते समय हल्का सा दर्द होता है उसी तरीके से इसमें भी दर्द होता है.
ये हल्का और सुरक्षित होता है. लंबे समय तक चलता है. इससे पशु को कोई परेशानी भी नहीं होती है.
निष्कर्ष
ईयर टैगिंग का फायदा आपको पता चल ही गया होगा. अगर आप भी चाहते हैं कि ये फायदे आपको भी मिलें तो आज ही पशु की ईयर टैगिंग कराएं.










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