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Animal News: ‘स्वर्णिम दुग्धामृत संवाद समागम से वन ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी बनेगा उत्तर प्रदेश सरकार

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प्रतीकात्मक तस्वीर

नई दिल्ली. पशुपालन से जुड़े किसान और डेयरी सेक्टर उत्तर प्रदेश की सरकार की प्राथमिकता में शामिल हैं. आज डेयरी क्षेत्र उत्तर प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुका है. इसी क्रम में सीएम योगी की मंशा के अनुरूप प्रदेश के 18 मंडलों पर ‘स्वर्णिम दुग्धामृत संवाद समागम’ आयोजित करने की मेरठ से शुरुआत हो गई है. अपर मुख्य सचिव पशुधन, मत्स्य एवं दुग्ध विकास मुकेश कुमार मेश्राम ने बताया कि डेयरी क्षेत्र को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए मंडल स्तर पर यह कार्यक्रम आयोजित होंगे. इसका समापन दिसंबर में गोरखपुर में होगा.

उन्होंने बताया कि मेरठ में मंगलवार को चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के अटल सभागार में ‘स्वर्णिम दुग्धामृत संवाद समागम’ आयोजित किया गया. इसका उद्देश्य दुग्ध विकास विभाग के 50 वर्ष पूरे होने पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और डेयरी क्षेत्र को बढ़ावा देना है. उन्होंने बताया कि ‘स्वदेशी उन्नत गोवंश, समृद्ध निवेश, सुरक्षित भविष्य-खुशहाल उत्तर प्रदेश’ थीम पर आधारित इस आयोजन में मेरठ-सहारनपुर मंडल के किसान, पशुपालक और निवेशक एक मंच पर जुटे. कार्यक्रम में निजी एवं सहकारी डेयरी जैसे भारत स्किर, मधुसूदन, आनन्दा, मदर डेयरी, हरित प्रदेश, केएसएस डेयरी, अरविन्द डेयरी और पराग जैसे बड़े ब्रांड्स के स्टॉल लगाकार अपने उत्पादों का प्रदर्शन किया.

दुग्ध विकास क्षेत्र में मिलेगा हजारों लोगों को रोजगार
उन्होंने बताया कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को वन ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी बनाने के लिए दुग्धशाला विकास विभाग द्वारा संचालित नंद बाबा दुग्ध मिशन, उत्तर प्रदेश दुग्धशाला विकास एवं दुग्ध प्रोत्साहन नीति-2022 के प्रचार-प्रसार किया जा रहा है.

जबकि प्रदेश के डेयरी सेक्टर में पूंजी निवेश को आकर्षित करने के उद्देश्य से संपूर्ण मंडलवार डेयरी कॉन्क्लेव का आयोजन किया जा रहा है.

कार्यक्रम में दुग्ध आयुक्त धनलक्ष्मी के ने बताया कि उत्तर प्रदेश दुग्ध उत्पादन में देश का अग्रणी राज्य है और इस स्थिति को बनाये रखने के राज्य सरकार द्वारा अनेक महत्वपूर्ण योजनाएं चल रही हैं.

जिसके माध्यम से किसानों को सुनिश्चित बाजार, पारदर्शी मूल्य निर्धारण और स्थायी आय प्रदान की है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार प्राप्त हुआ है.

दुग्ध आयुक्त धनलक्ष्मी के. ने बताया कि वर्ष 2023 से विभाग द्वारा दुग्ध विकास क्षेत्र में कुल 28,000 करोड़ से अधिक के 796 एमओयू किए गये हैं, जिसके जरिए 77,000 से अधिक रोजगार सृजन होंगे.

उन्होंने बताया कि विगत वर्षों में नंद बाबा दुग्ध मिशन के अंतर्गत 10 हजार से अधिक लाभार्थियों को 84 करोड़ की धनराशि अनुदान के रूप में डीबीटी के माध्यम से वितरित की गई है.

साथ ही 4000 से अधिक शुरुआती दुग्ध सहकारी समिति गठित करते हुए लगभग 1,50,000 दुग्ध उत्पादकों को जोड़ा गया है.

अपर मुख्य सचिव मुकेश कुमार मेश्राम ने बताया कि स्वर्ण जयंती डेयरी कॉनक्लेव के जरिए प्रदेश के सभी 18 मंडल और 75 जिलों के पशुपालकों और दुग्ध उत्पादन से जुड़े लोगों को जोड़ा जा रहा है.

इस दौरान कई नई टेक्नोलॉजी, स्वदेशी नस्ल के गो-पालन, ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ीकरण पर विचार विमर्श एवं अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां विशेषज्ञों द्वारा साझा की जाएगी.

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