नई दिल्ली. मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के मत्स्य पालन विभाग द्वारा वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के साथ मिलकर आंध्र प्रदेश सरकार के सहयोग से समुद्री खाद्य निर्यात पर एक राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में किया गया. जिसके जरिए समुद्री खाद्य निर्यात तंत्र का व्यापक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हुआ. इस कार्यशाला में केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों ने भाग लियात्र इसमें समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एमपीईडीए), निर्यात निरीक्षण परिषद (ईआईसी), राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (एनएफडीबी), नाबार्ड, राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी), राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड (एनसीईएल), लघु कृषक कृषि व्यापार संघ (एसएफएसी) और इन्वेस्ट इंडिया सहित प्रमुख राष्ट्रीय संस्थानों ने भाग लिया.
इस कार्यशाला में समुद्री खाद्य निर्यातकों, उद्योग संघों, प्रसंस्करणकर्ताओं, स्टार्टअप्स और अन्य मूल्य श्रृंखला हितधारकों ने भी भाग लिया. विचार-विमर्श में भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी समुद्री खाद्य निर्यातक राष्ट्र के रूप में स्थापित करने पर जोर दिया गया. इसमें प्रमुख क्षेत्रों में मात्रा-आधारित निर्यात से मूल्यवर्धित, उच्च-गुणवत्ता वाले उत्पादों की ओर बदलाव, साथ ही नवाचार, उन्नत प्रौद्योगिकियों और मजबूत ट्रेसिबिलिटी प्रणालियों को बढ़ावा देने पर चर्चा की गई ताकि भारत के वैश्विक समुद्री खाद्य ब्रांड को मजबूती मिल सके.
निर्यात बढ़ाने के लिए उठाए जांगे ये कदम
इन चर्चाओं में कुशल और अनुपालनपूर्ण व्यापार सुनिश्चित करने के लिए कोल्ड चेन, एयर कार्गो और क्वारंटाइन सुविधाओं सहित निर्यात बुनियादी ढांचे और लॉजिस्टिक्स के विस्तार की आवश्यकता पर भी बल दिया गया.
अंतर्देशीय मत्स्य पालन से निर्यात बढ़ाने के महत्व पर जोर दिया गया. यह उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान देता है.
इसमें रेडी-टू-ईट उत्पादों और उच्च मूल्य वाली प्रजातियों जैसे उभरते क्षेत्रों में अप्रयुक्त क्षमता का लाभ उठाने पर भी बल दिया गया.
मंत्रियों ने प्रसंस्करण क्षमता और मूल्य श्रृंखलाओं को मजबूत करने के साथ-साथ स्थिरता, गुणवत्ता आश्वासन और नियामक अनुपालन पर बल दिया.
एक लचीला और भविष्य के लिए तैयार समुद्री खाद्य निर्यात तंत्र बनाने के लिए समग्र सरकारी दृष्टिकोण अपनाने, बहुआयामी लॉजिस्टिक्स में सुधार करने और निवेश, नवाचार और निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देने पर भी बल दिया गया.
मत्स्य पालन विभाग के संयुक्त सचिव श्री सागर मेहरा ने उत्पादन बढ़ाने, ट्रेसिबिलिटी और प्रमाणन ढांचे को मजबूत करने और चल रहे सुधारों और प्रमुख योजनाओं के माध्यम से गहरे समुद्र और ईईजेड संसाधनों में अप्रयुक्त क्षमता का दोहन करने पर जोर दिया.
वाणिज्य विभाग के अपर सचिव अजय भादू ने भारत के निर्यात क्षमता, बदलते वैश्विक बाजार की गतिशीलता और समुद्री खाद्य निर्यात को बढ़ाने में मुक्त व्यापार समझौतों, बाजार विविधीकरण और बढ़ी हुई प्रतिस्पर्धा की भूमिका के बारे में बताया-
खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के संयुक्त सचिव डी. प्रवीण ने प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन को बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया, वैश्विक मानकों के मुकाबले कमियों के बारे में बताया.
निर्यात मूल्य प्राप्ति में सुधार के लिए कोल्ड चेन विकास, प्रसंस्करण अवसंरचना और मूल्य श्रृंखला एकीकरण का बढ़ावा देने वाली प्रमुख योजनाओं के बारे में बताया.











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