नई दिल्ली. पोल्ट्री फार्मिंग एक बेहतरीन काम है और मध्य प्रदेश सरकार भी इसको बढ़ावा देने का काम कर रही है. सरकारी की तरफ से पोल्ट्री फार्मिंग के जरिए से हितग्राहियों की आर्थिक स्थिति में सुधार और कड़कनाथ नस्ल के संरक्षण एंव संवर्धन के लिए अनुदान पर कडकनाथ चूजे का प्रदाय नाम से योजना चलाई जा रही है. जिसके तहत सब्सिडी के तौर पर कड़कनाथ चूजे पोल्ट्री फार्मर्स को दिए जा रहे हैं. इसके अलावा फी आदि भी सब्सिडी पर सरकार की ओर से दी जाएगी. यदि आप योजना का फायदा लेना चाहते हैं तो इस रिपोर्ट को पूरा पढ़ें.
यह योजना सभी वर्ग के हितग्राहियों के लिये है. सभी पोल्ट्री फार्मर्स को सरकार की तरफ से 28 दिन के 40 चूजे इस योजना के तहत दिए जाने हैं. इसके अलावा फीड दवा और परिवहन का प्रावधान भी सरकार की तरफ से सब्सिडी पर किया जाएगा. बताते चलें कि ये योजना प्रदेश के समस्त जिलों मे संचालित की जा रही है.
कितनी मिलेगी सब्सिडी
इकाई लागत की बात करें तो एक चूजे का दाम 65 रुपए निर्धारित है. जबकि 40 चूजा 2600 रुपए का पड़ेगा.
दवा और वैक्सीनेशन पर प्रति चूजा पांच रुपए का खर्च आएगा. वहीं परिवहन पर चिक बाक्स सहित 210 रुपए का खर्च आएगा.
पोल्ट्री फीड 48 ग्राम प्रति पक्षी प्रतिदिन आएगा. 30 दिन के लिए कुल आहार 58 किलो इस्तेमाल होगा. फीड 24 रुपए किलो के हिसाब से 1390 रुपए का होगा.
इस तरह कुल 4400 रुपए का खर्च आएगा. सब्सिडी सभी वर्ग के लिये 75 प्रतिशत और खुद पोल्ट्री फार्मर को 25 फीसद खर्च करना होगा.
चयन प्रक्रिया की बात की जाए तो पोल्ट्री किसान को ग्राम सभा में अनुमोदन के आधार पर चयन किया जाएगा.
योजना से संबंधित जानकारी संबंधित जिले के नजदीकी पशु चिकित्सा अधिकारी, पशु औषधालय के प्रभारी और उपसंचालक पशु चिकित्सा से ले सकते हैं.
बता दें कि कड़कनाथ मुर्गा 4 से 5 महीने में पूरी तरह से तैयार हो जाता है. इसका मांस बाजार में 1200 से लेकर 1800 रुपये किलो तक बिकता है.
इसमें पाए जाने वाले औषधि गुण के कारण बाजार में इसकी मांग बहुत ज्यादा रहती है. कड़कनाथ मुर्गी चारे में बरसीम और चरी आदि खाना पसंद करती है.
उनके पालने में लागत कम आती है और मुनाफा ज्यादा होता है. खास बात यह भी है कि अन्य मुर्गी की तुलना में इसमें वसा और कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम होती है.











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