नई दिल्ली. पोल्ट्री फार्मिंग में आने वाला वक्त चुनौतियां से भरा है. एक्सपर्ट का कहना है कि ब्रॉयलर बर्ड की प्रति किलोग्राम कीमत 150 रुपए के आसपास रहने की संभावना है. जबकि कुछ महीनों पहले तक कुछ राज्यों में इसके दाम 100 रुपए से नीचे तक रहते थे. जिसमें उत्तर प्रदेश भी शामिल है. इस संबंध में पोल्ट्री फेडरेशन ऑफ इंडिया के प्रेसिडेंट रणपाल ढांडा का कहना है कि आने वाले सालों में ब्रॉयलर की कीमतें 140–150 प्रति किलोग्राम के दायरे में ही रहने की संभावना है. उन्होंने इसकी दो प्रमुख वजह गिनाई है.
पीएफआई के प्रेसिडेंट ने कहा कि ब्रॉयलर मुर्गों की ज्यादा मौत होने की चुनौतियां फार्मर्स के सामने हैं. इसके अलावा फीड की बढ़ती कीमतों के कारण प्रोडक्शन की लागत ज्यादा बनी रहने की उम्मीद है. इससे ब्रॉयलर मुर्गों के रेट ज्यादा होंगे. ऐसे में कहा जा सकता है कि इससे आम जनता को भी चिकन महंगा मिलेगा.
एमएसपी का असर भी पड़ रहा है.
ढांडा ने आगे कहा कि सरकार ने सोयाबीन और मक्का के लिए मिनिमम सपोर्ट प्राइस (MSP) बढ़ा दिया है. जिसका असर इस इंडस्ट्री पर पड़ रहा है.
बोले कि सोयाबीन और मक्का के लिए मिनिमम सपोर्ट प्राइस (MSP) बढ़ा देने से भविष्य में पोल्ट्री चारे की कीमतें ज्यादा रहने की संभावना है.
पूरे साल ब्रॉयलर की सही और मुनाफे वाली कीमतें बनाए रखने के लिए, इंडस्ट्री को हर पक्षी का औसत मार्केट वजन 2.0–2.1 किलोग्राम बनाए रखने पर ध्यान देना होगा.
साथ ही, जरूरत से ज्यादा सप्लाई से बचने के लिए प्रोडक्शन को मार्केट की मांग के हिसाब से करना चाहिए.
सही प्रोडक्शन प्लानिंग, बेहतर फ़ार्म मैनेजमेंट, बेहतर फीड एफिशिएंसी, मुर्गियों की कम मौत और अनुशासित मार्केटिंग से मार्केट को स्थिर करने और किसानों व इंटीग्रेटर्स दोनों के लिए उचित रिटर्न सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी.
उन्होंने कहा कि मुनाफा बनाए रखने, पोल्ट्री सेक्टर को मजबूत करने और लंबे समय तक टिकाऊ विकास हासिल करने के लिए सभी स्टेकहोल्डर्स का मिलकर काम करना जरूरी है.
निष्कर्ष
गौरतलब है कि मौजूदा वक्त में पंजाब, पुणे, बेंगलुरु, हैदराबाद, कोलकाता, भोपाल, चेन्नई, लखनऊ, नासिक और बिहार जैसी मंडियों में रेट 140 से 150 रुपए प्रति किलो के आसपास है. ये ट्रेंड पीएफआई के प्रेसिडेंट की बातों पर मुहर लगाने वाले हैं. इसलिए उनकी ओर दी गई सलाह पर अमल करने की जरूरत है.











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