नई दिल्ली. पोल्ट्री फार्मिंग में जब ब्लैक ऑस्ट्रेलॉर्प की बात होती है तो ये कहना गलत नहीं होगा कि ये उत्कृष्ट उत्पादन करने वाली मुर्गी है. साथ ही इसका शरीर मजबूत होता है और ज्यादा अंडा देने की क्षमता ये रखती है. बता दें कि ब्लैक ऑस्ट्रेलॉर्प विश्व की सबसे प्रसिद्ध और भरोसेमंद लेयर नस्ल है, जो अधिक अंडों के लिए जानी जाती है. इसको प्राकृतिक तरह से पाला जाए और तो ये बेहद ही अच्छी नस्ल है. सही फीड मैनेजमेंट से बेहतर उत्पादन देगी और जल्दी बीमार भी नहीं पड़ेगी. इसलिए एक्सपर्ट से नस्ल की मुर्गी को पालने की सलाह देते हैं.
जाहिर है इस नस्ल की मुर्गी को अंडा लेने के लिए पाला जाता है तो ये सवाल लाजिमी है कि अंडे देना कब से शुरू करती है? एक्सपर्ट का कहना है कि 18-22 सप्ताह (126-154 दिन) की उम्र में अंडे देना शुरू कर देती है. जो एक मुर्गी पालक के लिए बेहद ही जरूरी है.
आइए खाासियत के बारे में जानें
शारीरिक विशेषताओं की बात की जाए तो मादा मुर्गी का वजन 2.7-3.6 किलो होता है.
औसतन 3.2 kg) शरीर होता है और इसका शरीर गोल, चौड़ा साथ ही मजबूत होता है.
पंख चमकदार काले होते हैं. जबकि इसकी आखें गहरी भूरी होती हैं.
कुल जीवन काल की बात की जाए तो 8 से 10 वर्ष होता है. जबकि अच्छी देखभाल में 12 वर्ष तक जीती हैं.
एक्सपर्ट कहते हैं कि बेहतरीन देखभाल और संतुलित आहार से यह नस्ल लंबा और स्वस्थ जीवन जीती हैं.
इसके अंडे का रंग हल्का भूरा से गहरा भूरा होता है. छिलका बेहद मजबूत होता है.
अंडे का वजन औसतन 60 ग्राम होता है. ये स्वाद में बेहतरीन होता है.
पोषण की बात करें तो उच्च प्रोटीन और ओमेगा-3 इसमें होता है.
1-7 दिन चूजा वजन में 30-45 ग्राम का होता है.
इसके शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत बेहतर होती है.
बीमारियों के प्रति सहनशीलता अधिक होती है.
इस वजह से इन्हें कम दवाओं की आवश्यकता होती है.
बेहतर पाचन और पोषण अवशोषण क्षमता इनमें होती है.
ठंड और गर्म दोनों ही मौसम के अनुकूल हैं.
ठंडे मौसम में अत्यधिक ठंड सहन करने की क्षमता होती है.
जबकि गर्म मौसम में उच्च तापमान में भी अच्छा उत्पादन करने की क्षमता होती है.
भारत के हर क्षेत्र में सफलतापूर्वक पाली जाती है.
निष्कर्ष
यदि आप मुर्गी पालन अंडों के उत्पादन के लिए करना चाहते हैं तो फिर इस नस्ल की मुर्गी को पाल सकते हैं. ताकि अच्छी कमाई हो सके.











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