नई दिल्ली. पोल्ट्री फार्मिंग के बिजनेस के लिए सबसे बड़ी दुश्मन बीमारियां हैं. बीमारियों में सबसे खतरनाक एविएन इन्फ्लूएंजा है. ये वायरस पक्षियों में बहुत तेजी से फैलता है. इसके संक्रमण से पक्षियों में 100 फीसदी तक की मृत्यु दर दिखाई है. इस रोग के वायरस पक्षी की लार, नाक आंख के स्राव व बीट में पाए जाते हैं. संक्रमित पक्षी के सीधे संपर्क से या संक्रमित बीट वाले के संपर्क में आए व्यक्ति के खाने, उपकरण आदि से भी ये रोग फैल जाता है. इंफेक्शन पर 3 से 5 दिन में लक्षण दिखाई देने लगते हैं.
इस बीमारी के होने से या फिर कई बार आशंका भर से पोल्ट्री का कारोबार अर्श से फर्श पर आ जाता है. इस बीमारी के होने से लोग चिकन और अंडा खाना कम कर देते हैं. इससे डिमांड घट जाती है. जिससे पोल्ट्री कारोबारियों को नुकसान होता है. हालांकि अच्छी तरह से पकाकर खाने से चिकन और अंडा दोनों से इस वायरस का खतरा खत्म हो जाता है. पोल्ट्री एक्सपर्ट का कहना है कि इस वायरस से बचाव के लिए वैक्सीन बेहद जरूरी है. इसलिए समय पर वैक्सीन लगवाना चाहिए.
क्या है वैक्सीन की खासियत
गौरतलब है कि हाल ही में पोल्ट्री फार्मिंग में ज्यादा घातक और रोगजनक एवियन इन्फ्लूएंजा बीमारी से पोल्ट्री बर्ड के बचाव के लिए HPAI वैक्सीन इंपोर्ट और मैन्युफैक्चरिंग के लिए मंजूरी मिली है.
एक्सपर्ट का कहना है कि ये इतनी बेहतरीन वैक्सीन है कि इससे 90 से 100 फीसद तक पोल्ट्री फार्मिंग में बर्ड की मृत्यु दर को रोका जा सकता है.
इंपोर्ट और मैन्युफैक्चरिंग को मिली मंजूरी के कारण देश में बर्ड फ्लू के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है.
इससे पोल्ट्री फार्मिंग में होने वाले नुकसान से भी पोल्ट्री फार्मर को बचाया जा सकता है. इससे पोल्ट्री कारोबार और तेजी के साथ आगे बढ़ने की उम्मीद एक्सपर्ट जता रहे हैं.
एक्सपर्ट इस वैक्सीन के बारे में बताते हैं कि यह पक्षियों में वायरस को पूरी तरह से खत्म नहीं करती लेकिन वार्ड में वायरल शेडिंग को काफी कम कर देती है
इससे पर्यावरण में वायरस का प्रसार रुक जाता है और पोल्ट्री बर्ड को एवं इन्फ्लूएंजा के खतरे से बचाया जा सकता है
निष्कर्ष
इसकी यह भी खासियत है कि वैक्सीन को वैज्ञानिक हर बार नए स्ट्रेन के साथ अपडेट करते हैं. ताकि फील्ड में मौजूद वायरस से सही मैच करा के बीमारी को रोका जा सके. जिससे पोल्ट्री फॉर्मर्स को फायदा मिलता है.












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