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Animal: रेबीज से पशुओं को नहीं होगा कोई नुकसान, बस ये काम कर लें

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प्रतीकात्मक तस्वीर

नई दिल्ली. कुत्तों के काटने की वजह से होने वाली रेबीज एक बेहद घातक वायरल बीमारी है जो सभी स्तनधारी पशुओं को प्रभावित करती है. और ज्यादा खतरनाक बात ये है कि यह रोग संक्रमित पशु के काटने या उसकी लार के संपर्क में आने से भी फैलता है. और एक बार लक्षण दिखने के बाद लगभग 100 फीसद केस में पशु की मौत होना तय है. ऐसे में पशुपालकों को एक झटके में हजारों रुपय का नुकसान हो जाता है. इसलिए पशुओं को कुत्तों की पहुंच से दूर रखना चाहिए. जिससे इस तरह की समस्या न हो.

एक्सपर्ट का कहना है कि इससे बचाव के लिए अपने सभी पालतू और पशुओं को रेबीज वैक्सीन समय पर लगवाएं. आवारा या बीमार पशुओं से संपर्क न होने दें. खासकर कांटने से बचाएं. एक्सपर्ट के मुताबिक रेबीज से 100 फीसद सुरक्षा संभव है, लेकिन तब जब समय पर वैक्सीन लगवाई जाए. जबकि एक बार इसके लक्षण दिखाई देने लगें तो फिर पशु की मौत लगभग तय है.

लक्षणों के बारे में जानें

  1. व्यवहार में परिवर्तन (आक्रामकता या असामान्य चिड़चिड़ापन)
  2. बहुत ज्यादा लार टपकना (मुंह से पानी टपकना या झाग आना)
  3. निगलने में कठिनाई यानि (खाना-पानी निगलने में दिक्कत)
  4. भूख कम हो जाना या खाना छोड़ देना
  5. बेचैनी और घबराहट (शांत न बैठ पाना)
  6. असामान्य आवाज निकालना (भौंकना, चिल्लाना,)
  7. वस्तुओं, पशुओं या इंसानों को काटने की प्रवृत्ति
  8. लड़खड़ाना या चलने में असंतुलन, कमजोरी
  9. पक्षाघात के लक्षण (शुरुआत पीछे के पैरों से)
  10. दौरे पड़ना (कभी-कभी झटके)
  11. बेहोशी की स्थिति (कोमा में जाना)
  12. मृत्यु (लक्षण दिखने के 2-7 दिनों के भीतर अधिकांश मामलों में)

गाय-भैंस जैसे पशुओं में देखने वाले विशेष लक्षण

  1. दूक्ष उत्पादन में अचानक कमी
  2. अत्यधिक लार टपकना या मुंह से झाग आना
  3. निगलने में कठिनाई, खाना-पानी नहीं निगलना
  4. असामान्य आवाज़त्र निकालना या रंभाना
  5. उत्तेजना, चिड़चिड़ापन या हमला करने की प्रवृत्ति
  6. पीछे के पैरों में कमज़ोरी या लकवा
  7. लक्षण आने के कुछ दिनों के भीतर मृत्यु

निष्कर्ष
बता दें कि कुत्ते, बिल्लियां, बकरी, भेड़, घोड़े और जंगली पशु भी इस रोग से संक्रमित हो सकते हैं. इसमें एक बार लक्षण दिखने के बाद कोई प्रभावी इलाज नहीं होता. इसलिए संदेह होने पर तुरंत संक्रमित पशु को अलग रखें. पशु चिकित्सक या पशु विभाग को तुरंत सूचना दें. इंसानों और अन्य पशुओं को संक्रमित पशु के संपर्क से बचाएं. क्योंकि रोकथाम ही सबसे बड़ा बचाव है.

Written by
Livestock Animal News Team

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