नई दिल्ली. पशुपालन विभाग द्वारा संचालित मोबाइल वेटनरी यूनिट (एमवीयू) के प्रभावी संचालन को लेकर जारी दिशा-निर्देशों की अवहेलना को गंभीरता से लेते हुए पशुपालन विभाग के निदेशक डॉ सुरेश चंद मीना ने संबंधित नौ जिलों सिरोही, सीकर, भीलवाड़ा, सलूम्बर, बीकानेर, राजसमन्द, जोधपुर, नागौर तथा ब्यावर के संयुक्त निदेशकों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं. मीना ने कहा कि प्रदेशभर में मोबाइल वेटनरी यूनिट का उद्देश्य पशुपालकों को समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण एवं सुलभ पशु चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराना है. इसके लिए विभाग द्वारा समय-समय पर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं, जिनका सभी अधिकारियों द्वारा अक्षरशः पालन किया जाना जरूरी है.
इन नौ जिलों में मोबाइल वेटनरी यूनिट के संचालन एवं पर्यवेक्षण में निर्धारित दिशा-निर्देशों का समुचित पालन नहीं किया गया. बार बार दिशा निर्देश जारी करने के बाद भी न तो कोई अपेक्षित सूचना निदेशालय को भिजवाई गई और न ही निर्देशों की अनुपालना में कार्यवाही का कोई प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया.
कई रुकावटे आ रही हैं
उन्होंने कहा कि इससे न केवल विभागीय कार्यप्रणाली प्रभावित हो रही है बल्कि राज्य सरकार द्वारा संचालित मोबाइल वेटनरी सेवाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में भी बाधा उत्पन्न हो रही है.
इस पर गंभीर संज्ञान लेते हुए संबंधित संयुक्त निदेशकों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिए गए हैं.
सभी जिलों के संयुक्त निदेशकों को अपना स्पष्टीकरण देने के लिए दो दिन का समय दिया गया है. स्पष्टीकरण प्राप्त न होने की स्थिति में उनके विरूद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी.
डायरेक्टरमीना ने स्पष्ट किया है कि विभागीय कार्यों में लापरवाही, उदासीनता अथवा शासन के निर्देशों की अवहेलना किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं की जाएगी.
सभी क्षेत्रीय अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि मोबाइल वेटनरी यूनिट के संचालन की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करें तथा प्रत्येक कॉल पर त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराएं.
उन्होंने कहा कि विभाग का उद्देश्य पशुपालकों को बेहतर सेवाएं प्रदान करना है। इसमें किसी भी प्रकार की शिथिलता पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों एवं कार्मिकों के विरुद्ध नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी.
क्या है ये सुर्विस
असल में मोबाइल वेटनरी यूनिट एक चलता-फिरता पशु अस्पताल है, जिसकी सर्विस टोल-फ्री नंबर 1962 पर कॉल करने पर मिलती है. इस सुविधा के तहत पशुओं का घर पर इलाज मिलता है. वैक्सीन लगाई जाती है. इमरजेंसी इलाज की सुविधा उपलब्ध रहती है. इससे डॉक्टरों की टीम पशुपालकों के दरवाजे पर पहुंचकर बीमार व घायल पशुओं का इलाज करती है.












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