नई दिल्ली. ऐसा हर बार नहीं होता है कि पशु का सिर्फ दूध उत्पादन कम हो. कई बार फैट और एसएनएफ जैसे जरूर तत्व दूध में कम हो जाते हैं. जबकि डेयरी फार्मिंग जितना जरूरी है कि पशु भरपूर दूध का उत्पादन करे, उतना ही जरूरी ये भी है कि दूध में फैट और एसएनएफ की मात्रा भी भरपूर हो. ऐसा न होने से दूध का दाम कम मिल सकता है. बड़ी-बड़ी डेयरी कंपनियां तो फैट और एसएनएफ को देखकर ही दूध का दाम लगाती हैं. कम एसएनएफ और फैट हुआ तो फिर दाम कम मिलता है.
एक्सपर्ट का कहना है कि कई बार गर्मी में पशु दूध पहले जितना ही उत्पादित करता है लेकिन दूध से फैट और SNF कम हो जाता है. जबकि इसकी असली वजह 90 फीसद तक पशुपालक नहीं जानते हैं. जान लें कि फैट और SNF दूध की क्वालिटी और दाम तय करते हैं. इनके कम होने से सीधा नुकसान होता है.
क्यों होता है कम, यहां जान लीजिए
चारे का कम सेवन गर्मी में पशु कम खाता है. रूमेन में कम फाइबर पहुंचता है. जिससे दूध का फैट घटता है.
रूमेन का पीएच बिगड़ना गर्मी में हरा चारा और दाना बढ़ा देने व सूखा चारा कम करने से रूमेन एसिडिक हो सकता है (acidosis) जिससे फैट गिर जाता है.
ऊर्जा का अधिक खर्च गर्मी में शरीर का बड़ा हिस्सा खुद को ठंडा रखने में खर्च होता है, दूध बनाने के लिए कम ऊर्जा बचती है.
बचाव कैसे करें?
ऐसे में पशु को 24 घंटे साफ और ठंडा पानी उपलब्ध कराएं.
पर्याप्त सूखा चारा (फाइबर) अवश्य दें.
संतुलित दाना, मिनरल मिक्सचर और बफर (जैसे सोडियम बाइकार्बोनेट) विशेषज्ञ की सलाह से दें.
ध्यान रखें कि गर्मी में केवल दूध की मात्रा ही नहीं, उसकी क्वालिटी (फैट और SNF) भी कम हो सकती है.
मुख्य कारण
दूध उत्पादन में बदलाव हीट स्ट्रेस से दूध की मात्रा के साथ फैट, प्रोटीन और लैक्टोज भी कम बनने लगते हैं.
खनिज व इलेक्ट्रोलाइट की कमी से पसीना और तेज सांस लेने से इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन होता है, रूमेन के सूक्ष्मजीव प्रभावित होते हैं.
हीट स्ट्रेस हामोंन गर्मी में कोर्टिसोल जैसे हामोंन बढ़ जाते हैं, पोषक तत्व दूध के बजाय शरीर को ठंडा रखने में उपयोग होते हैं.
पंखें, फॉगर्स /स्प्रिंकलर और अच्छी वेंटिलेशन से हीट स्ट्रेस कम करें.
वहीं पशु को सुबह और शाम के ठंडे समय में अधिक चारा दें.
निष्कर्ष
एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि दूध में फैट और एसएनएफ की कमी को हल्के में न लें. क्योंकि इससे डेयरी फार्मिंग में सीधे नुकसान होगा.












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