नई दिल्ली. पोल्ट्री एक्सपर्ट का कहना है कि मुर्गी पालन में लागत को कम करने के लिए समय-समय पर मुर्गियों को घर का बनाया हुआ दाना या घर का जो भी बचा हुआ खाना होता है वह खाने के लिए दिया जा सकता है. इसको खाकर भी मुर्गियां अपना पेट भर लेती हैं और पौष्टिक अंडों का उत्पादन करती हैं. पोल्ट्री फार्मिंग में ज्यादा खर्च फीड पर होता है, जबकि अनाज और बचा हुआ खाना आदि देने से फीड के खर्च को कम करके मुनाफे को काफी हद तक बढ़ाया जा सकता है. बता दें कि मुर्गियां सब्जियों का छिलका भी खाती हैं.
आप उन्हें सहजन के पत्ते खाने के लिए दे सकते हैं. यदि घर का बचा हुआ खाना, अनाज और सब्जियों के छिलके मुर्गियों को खिलाते हैं तो फीड पर बिना पैसा खर्च किए ही आप मुर्गियों को पाल लेंगे और जब बेचने जाएंगे तो फिर शुद्ध मुनाफा ही मिलेगा. क्योंकि आपने मुर्गियों के फीड पर होने वाला पूरा का पूरा खर्च बचा लिया है. जिससे पोल्ट्री फार्मिंग में फायदा बढ़ना तय है.
घर पर बनाएं, फीड खिलाएं
एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि मुर्गियों को महंगे कमर्शियल फीड की जगह आप घर का बना सस्ता और पौष्टिक आहार भी दे सकते हैं.
घर पर इसे बनाने के लिए इसमें मक्का, बाजरा, गेहूं, टूटा चावल, दलों का चूरा या सोयाबीन प्रोटीन के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं.
इसके अलावा भी आप मुर्गियों को चराने के लिए फ्री रेंज में छोड़ दें. वह खुद ब खुद अपना भोजन तलाश कर लेते हैं
देसी मुर्गियां घास आदि को भी खा लेती हैं और उसके अंदर मौजूद कीट आदि को भी अपना भोजन बना लेती है
कम लागत में प्रोटीन बढ़ने के लिए अजोला और केंचुआ का उत्पादन घर पर ही करके उन्हें खिलाया जा सकता है. इससे भी फीड की लागत को कम किया जा सकता है
मुर्गियां अगर अंडा देने वाली हैं तो उनके छिलके को मजबूत करने के लिए चारे में थोड़ा सा कैल्शियम पाउडर या पिसा हुआ चूना मिलाया जा सकता है.
निष्कर्ष
एक्सपर्ट कहते हैं कि मुर्गी पालन में भी काफी उतार—चढ़ाव देखने को मिलता है. इसलिए जरूरी है कि एक बार मुर्गी पालन की शुरुआत में इनकी संख्या कम रखें और फिर धीरे—धीरे अनुभव होने पर संख्या बढ़ा लें. इससे मुनाफा अच्छा मिलेगा.











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