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Animal Husbandry: गौशालाओं के बेहतर संचालन के लिए 505 करोड़ रुपए की सरकार ने की व्यवस्था

मध्य प्रदेश के एक गौशाला में चारा खाती गायें.

नई दिल्ली. भारतीय संस्कृति और ग्रामीण जीवन की धूरी माने जाने वाले गौ-वंश के संरक्षण के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने करुणा और संवेदनशीलता से भरा एक ऐतिहासिक कदम उठाया है. असल में मध्य प्रदेश में पशुपालन विभाग का नाम अब अधिकारिक रूप से ‘गौपालन विभाग’ कर दिया गया है. गौ-वंश के बेहतर और पौष्टिक आहार को सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने प्रति गौ-वंश मिलने वाली 20 रुपये की दैनिक आहार राशि को सीधे दोगुना करके 40 रुपये कर दिया है. इस योजना को निर्बाध रूप से चलाने के लिए प्रदेश के गौसंवर्धन बोर्ड को 505 करोड़ कृपये के भारी बजटीय कोष का विशेष प्रावधान किया गया है.

वर्तमान में सरकार के सहयोग से प्रदेश में 2,056 से अधिक गौ-शालाओं का सफल संचालन हो रहा है. इन गौशालाओं में 3 लाख 98 हजार से अधिक गौ-वंश का पूरी संवेदनशीलता के साथ पालन-पोषण किया जा रहा है.

पंचगव्य उत्पादों से गौशालाएं बनेंगी आत्मनिर्भर
जानकारी के मुताबिक 4 जिलों-आगर मालवा, इंदौर, ग्वालियर और उज्जैन में आधुनिक सुविधाओं से युक्त आदर्श गौशालाएं स्थापित की जा चुकी है, जबकि भोपाल, जबलपुर और सागर में इनका निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है.

पंचगव्य उत्पादों से गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम हो रहा है. सरकार ने स्वावलंबी गौ शालाओं की स्थापना नीति-2025 को मंजूरी दी है.

इसके तहत गौशालाओं के पंचगव्य उत्पादों, जैविक खाद, गोमूत्र अर्क और प्राकृतिक कीटनाशको की बिक्री के लिए एक आधुनिक मार्केटिंग नेटवर्क तैयार किया जा रहा है.

वहीं हाइड्रोलिक व्हीकल से गायों को नया जीवन मिल रहा है. असल में सड़कों पर दुर्घटनावग्रस्त या बीमार होने वाली असहाय गायों के त्वरित उपचार के लिए भी एक अनूठी व्यवस्था की गई है.

राज्य के प्रमुख शहरी और ग्रामीण केंद्रों पर अत्याधुनिक हाइड्रॉलिक कैटल लिफ्टिंग वाहनों की तैनाती की गई है. इसकी मदद से गायों को तुरंत इलाज देने में मदद मिल रही है.

असल में अत्याधुनिक हाइड्रोलिक वाहनों की तैनाती से सड़क पर घायल होने वाली असहाय गायों को बिना अतिरिक्त पीड़ा के तुरंत इलाज मिलना संभव हुआ है.

वहीं सरकार की ओर से गौशालाओं के बेहतर संचालन के लिए और प्रयास किए गए हैं. जैसे प्रति गाय दैनिक भत्ता बढ़ाया गया है.

दैनिक भत्ता 20 से बढ़कर अब 40 रुपए कर दिया गया है. ऐसा होने से अब गौशालाओं में पशुओं को अधिक पौष्टिक और पर्याप्त मात्रा में चारा-भूसा मिल सकेगा.

आत्मनिर्भरता का नया मॉडल एमपी में शुरू हुआ है. स्वावलंबी नीति के तहत जैविक खाद और गोमूत्र अर्क के व्यावसायिक विपणन से गौशालाओं की दैनिक आय में सुधार होगा.

Written by
Livestock Animal News Team

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