नई दिल्ली. कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) न सिर्फ ऊर्जा का बेहतरीन स्रोत है, बल्कि इससे डेयरी किसानों को काफी फायदा पहुंचता है और सीधे तौर पर उनकी इनकम बढ़ती है. एक्सपर्ट कहते हैं कि सीबीजी प्लांट के जरिए डेयरी किसान पशुओं के गोबर को व्यर्थ फेंकने के बजाय उसे बायोगैस प्लांट या गोबरधन योजना के माध्यम से बेचकर नियमित कमाई कर सकते हैं. इसी वजह से सरकार इसको बढ़ावा देने का भी काम का रही है. इसी के तहत 500-500 प्लांट के दो चरणों में 1,000 गोबर-आधारित CBG प्लांट स्थापित करने के लिए भारत-जापान साझेदारी भी हो चुकी है और उसपर काम चल रहा है.
इसी कड़ी में NDDB के चेयरमैन डॉ. मीनेश शाह ने ‘वर्ल्ड बायोगैस एसोसिएशन इंडिया कांग्रेस 2026’ में अहम बाते कहीं. उन्होंने ‘भारत की ऊर्जा सुरक्षा और नेट जीरो ट्रांजिशन के लिए रणनीतिक स्तंभ के रूप में बायोगैस और बायोमीथेन’ विषय पर उद्घाटन सत्र को संबोधित किया. वर्ल्ड बायोगैस एसोसिएशन की CEO शार्लेट मॉर्टन OBE ने स्वागत भाषण दिया और सत्र की अध्यक्षता चिंतन रिसर्च फाउंडेशन की प्रेसिडेंट शिशिर प्रियदर्शिनी ने की.
स्ड बायोगैस (CBG) की क्षमता पर जोर दिया
NDDB के चेयरमैन ने भारत के बायोगैस अवसर से एक इंटीग्रेटेड बायोगैस इकोसिस्टम की ओर बढ़ने पर प्रकाश डाला.
उन्होंने ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने, ग्रामीण समृद्धि को बढ़ावा देने, कचरा प्रबंधन में सुधार करने और कृषि स्थिरता का समर्थन करने में बायोगैस, विशेष रूप से कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) की क्षमता पर जोर दिया.
उन्होंने देश की बड़ी पशु आबादी से उत्पन्न गोबर के विशाल संसाधनों और इस क्षमता का उपयोग करने तथा विभिन्न बायोगैस मॉडलों की बात कही.
घरेलू, सामुदायिक, गौशाला, डेयरी प्लांट-आधारित बड़े पैमाने पर बायोगैस और CBG मॉडल को बड़े पैमाने पर लागू करने के NDDB के प्रयासों पर जोर दिया.
उन्होंने गोबर को इकट्ठा करने और CBG पर विशेष ध्यान देते हुए बायोगैस उत्पादन को बढ़ाने में डेयरी सहकारी समितियों की अहम भूमिका पर जोर दिया.
उन्होंने कहा कि गोबर-आधारित बायोगैस परियोजनाओं की व्यवहार्यता का आकलन ऊर्जा, जैविक उर्वरकों और कार्बन कटौती के लाभों को शामिल करने वाली एक इंटीग्रेटेड वैल्यू चेन के माध्यम से किया जाना चाहिए.
500-500 प्लांट के दो चरणों में 1,000 गोबर-आधारित CBG प्लांट स्थापित करने के लिए भारत-जापान साझेदारी पर रोशनी डाली.
डॉ. शाह ने कहा कि यह पहल जापान की तकनीक और परिचालन विशेषज्ञता को भारत के व्यापक डेयरी सहकारी नेटवर्क और ग्रामीण कार्यान्वयन क्षमताओं के साथ जोड़ेगी.
उन्होंने जोर दिया कि इस साझेदारी का उद्देश्य CBG, जैविक उर्वरकों, किसान सहकारी समितियों, तकनीक और वित्तपोषण का एक इंटीग्रेटेड इकोसिस्टम बनाना है.
जिससे टिकाऊ बायोगैस समाधानों को बड़े पैमाने पर अपनाया जा सके. इस सेशन में ‘इंडियाज बायोगैस इकोसिस्टम: ए लैंडस्केप रिव्यू’ किताब भी लॉन्च की गई.












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