Home पोल्ट्री Poultry Farming Tips: एक रात में ही पोल्ट्री फार्म पर लग सकता है ताला, भूलकर भी न करें गलतियां
पोल्ट्री

Poultry Farming Tips: एक रात में ही पोल्ट्री फार्म पर लग सकता है ताला, भूलकर भी न करें गलतियां

यह व्यस्क मुर्गियों में हरे-पीले रंग के दस्तों की छूतदार बीमारी है. यह पुलोरम से मिलती-जुलती बीमारी है.
प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. पोल्ट्री फार्मिंग में नए फार्मर्स से कई बार अनजाने में कुछ गलतियां हो जाती हैं और इन गलतियों की वजह से मुर्गी पालन में भारी नुकसान होता है और इसके चलते पोल्ट्री फार्म को बंद तक करना पड़ जाता है. यदि आप उन गलतियों के बारे में जानना चाहते हैं तो इस रिपोर्ट को अंत तक पढ़ें. असल में कई बार ब्रूडिंग का गलत तापमान (Improper Brooding Temperature) मुर्गी पालन में भारी नुकसान लेकर आता है. क्योंकि बहुत से नए किसान ब्रूडिंग रूम में थर्मामीटर नहीं लगाते और अंदाजे से ही हीटिंग बल्ब जलाते हैं. यदि तापमान कम रह जाए, तो चूजों को ठंड लगती है और वे एक-दूसरे के ऊपर चढ़कर दबकर मर जाते हैं.

एक्सपर्ट का कहना है कि यदि तापमान जरूरत से ज्यादा हो जाए, तो डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) के कारण चूजे सुस्त होकर बैठ जाते हैं. इसलिए ब्रूडिंग क्षेत्र में सही थर्मामीटर लगाएं और पहले हफ्ते में तापमान 32°C से 33°C के आसपास बनाए रखें.

दाने और पानी का गलत प्रबंधन
अक्सर फीडर बर्तनों को दाने से ऊपर तक भर देना गलती है. जिससे चूजे उसमें पैर रखते हैं और दाना जमीन पर बिखरकर 30 फीसद से 40 परसेंट तक बर्बाद हो जाता है.

ड्रिंकर में ज्यादा पानी भरने से पानी नीचे गिरता है, जिससे बिछावन (Litter) गीला हो जाता है और हानिकारक अमोनिया गैस बनती है, जो मुर्गियों में बीमारियों का कारण बनती है.

इसलिए दाने के बर्तनों (Feeders) की ऊंचाई हमेशा चूजों के पीठ के लेवल (Back Height) पर सेट करें ताकि दाना बाहर न गिरे.

बिछावन को हमेशा सूखा रखें, गीला होने पर तुरंत सुखाएं या बदलें. मुर्गियों को हमेशा ताजा और साफ पानी दें. बर्तन गंदे होने पर तुरंत साफ करें.

वैक्सीनेशन और बायोसिक्योरिटी (जैव-सुरक्षा) को हल्के में न लें
कई बार पैसे बचाने के चक्कर में या चूजों को स्वस्थ देखकर टीकाकरण (Vaccine) न करवाना भी गलती है.

रानीखेत (Ranikhet/ND) और गंबोरो (Gumboro/IBD) जैसी घातक बीमारियां आने पर पूरा फार्म रातों-रात खत्म हो सकता है .

बिना सोचे-समझे बाहरी लोगों, अज्ञात वाहनों या जानवरों को फार्म के अंदर आने देना भी बड़ी लगती है.

इसलिए पशु चिकित्सक की सलाह के अनुसार तय समय पर सभी टीके (वैक्सीन) लगवाएं और फार्म पर सख्त बायोसिक्योरिटी नियम लागू करें.

मार्केट रिसर्च किए बिना बड़े पैमाने पर फार्मिंग न शुरू करें
सोशल मीडिया पर वीडियो देखकर जोश में आकर बिना किसी अनुभव या बाजार समझ के 1,000 या 2,000 चूजे एक साथ डाल देना भी गलती है.

तैयार होने पर जब स्थानीय बाजार में खरीदार या सही भाव नहीं मिलता, तो मजबूरी में औने-पौने दाम में बेचकर भारी घाटा उठाना पड़ता है.

फार्म शुरू करने से पहले स्थानीय मीट मार्केट, चिकन की दुकानों और थोक व्यापारियों से संपर्क करें.

यह जांच लें कि आपके क्षेत्र में किस नस्ल की मांग सबसे ज्यादा है और क्या रेट मिलता है, उसके बाद ही उसी हिसाब से उत्पादन शुरू करें.

Written by
Livestock Animal News Team

Livestock Animal News is India’s premier livestock awareness portal dedicated to reliable and timely information.Every news article is thoroughly verified and curated by highly experienced authors and industry experts.

Leave a comment

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Related Articles

पोल्ट्री

Poultry Farming Tips: मुर्गी पालन नहीं करना चाहते हैं तो पालें बत्तख, इसमें है तगड़ा मुनाफा

नई दिल्ली. पोल्ट्री फार्मिंग में मुर्गी पालन के अलावा बत्तख पालन भी...

पोल्ट्री

Poultry News: बैकयार्ड पोल्ट्री फार्मिंग में साइंटिफिक तरीकों को अपनाने से मिलता है बेहतर उत्पादन

नई दिल्ली. पोल्ट्री फार्मिंग में बैकयार्ड पोल्ट्री फार्मिंग (Poultry Farming) कम बजट...

Vaccination reduces the use of antibiotics, hence reduce the AMR.
पोल्ट्री

Poultry: मुर्गियों को ट्रांसपोर्ट के लिए लोड करने से सबसे ज्यादा तनाव का सामना करना पड़ता है

नई दिल्ली. मुर्गियों को पकड़ने, लोड करने और ट्रांसपोर्ट के दौरान होने...

poultry farming
पोल्ट्री

Poultry: 4 मुर्गियों से शुरू करनें पोल्ट्री फार्मिंग, आगे चलकर खूब होगा मुनाफा

नई दिल्ली. क्या आप जानते हैं कि सिर्फ 4 देसी मुर्गियों से...