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Andamani Duck: अंडमान-निकोबार की पहचान है अंडमानी बत्तख, मीट और अंडों के लिए करते हैं पालन

इस बत्तख का आकार मध्यम होता है. ये बत्तख मुख्य रूप से मांस और अंडों के लिए पाली जाती हैं.
अंडमानी बत्तख की प्रतीकात्मक तस्वीर।

नई दिल्ली. बत्तख पालन आज लोगों के लिए मुनाफे का बिजनेस बन गया है. बहुत कम लागत में ही बत्तख पालन किया जा सकता है और लाखों की कमाई से की जा सकती है. बत्तखों के लिए बेहतर खान-पान और वातावरण बेहद जरूरी होता है, जिसके बत्तख आपके बिजनेस को लाखों रुपए कमा कर दे सके. बत्तख के खानपान का खर्चा बहुत कम होता है, इसलिए लागत उतनी नहीं आती है जितनी के मुर्गी पालन में होती है. अच्छी नस्ल की अगर आपके पास बत्तख हैं तो 1 साल में यह आपको अच्छी कमाई दे जाती है. बत्तख जमीन पर और पानी में दोनों जगहों पर ही पाली जा सकती हैं. आज हम बात कर रहे हैं एक ऐसी बत्तख की जो देश के अंडमान द्वीप समूह पर पाई जाती है.

बत्तख को जलीय पक्षी कहा जाता है, गांव के तालाब हों, धान का खेत हो या फिर फार्म, सभी जगह बतखों को पाला जा सकता है. बतख पालने के लिए 25 से 30 डिग्री सेल्सियस का तापमान सही रहता है.

अंडमानी बत्तख के बारें में: ये बत्तख अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के मध्य और उत्तरी भागों में पाई जाती हैं. इस बत्तख का आकार मध्यम होता है. ये बत्तख मुख्य रूप से मांस और अंडों के लिए पाली जाती हैं. अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की एक स्थानीय, दोहरे उद्देश्य वाली बत्तख की ये नस्ल स्थानीय स्तर पर बेहद प्रचलित है. स्थानीय लोग इन बत्तखों से मांस और अंडों की पूर्ति करते हैं.

अंडमानी बत्तखों की खासियत: अंडमानी बत्तख की खासियत है उसका आकार. मुख्य रूप से उत्तरी और मध्य अंडमान में मिलती हैं. मध्यम आकार की इन बत्तखों की विशेषता होती है कि तुलनात्मक रूप से लंबी गर्दन, काली नोक वाली पीले रंग की चोंच. इन बत्तखों की काली त्वचा होती है. गर्दन के चारों तरफ एक सफेद रंग की पट्टी होती है. अन्य देशी बत्तखों की तुलना इनकी टांग छोटी होती हैं. व्यस्क होने पर इनका वजन एक से डेढ़ किलो ग्राम तक होता है.

बत्तख पालने में आता है कम खर्चा: बत्तख पालने में बेहद कम खर्च आता है. अगर आप इसका पालन कर रहे हैं, तो आप अपने घर की रसोई का जो कचरा है, चावल, मक्का, चोकर, मछली, इन फूड को भी दे सकते हैं. यह बत्तखें खाने में बहुत पसंद करती हैं. उनका खानपान में अगर पास में तालाब है तो यह कीड़े और मकोड़े खाकर ही अपना पेट भर लेती हैं. राशन की बहुत ज्यादा इनका जरूरत नहीं पड़ती है.

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