नई दिल्ली. पशुपालन करने वाले पशुपालकों को इन दिनों ठंड की वजह से पशुओं की बढ़ती प्रजनन स्वास्थ्य समस्याओं जूझना पड़ता है. जिससे पशु को गर्भधारण करने में कई समस्याएं आती हैं और इसका असर पशु के उत्पादन और साथ ही पशुपालन के काम पर भी पड़ता है. जिसको देखते हुए गुरु अंगद देव पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, लुधियाना (Guru Angad Dev Veterinary and Animal Sciences University, Ludhiana) की तरफ से डेयरी पशुओं में बढ़ती प्रजनन स्वास्थ्य समस्याओं को दूर करने के लिए फार्मर फर्स्ट प्रोजेक्ट के तहत मेहल कलां में एक बांझपन उपचार कैंप लगाया गया.
एक्सपर्ट ने जब जांच की तो सामने आया है कि ज्यादातर मामलों में बार-बार गर्भधारण न होना, ओवेरियन सिस्ट, एनेस्ट्रस और अन्य प्रजनन संबंधी समस्याएं शामिल थी, जो गर्भधारण और दूध उत्पादन पर बुरा असर डालती हैं. इससे डेयरी फार्मिंग का बिजनेस बुरी तरह से प्रभावित होता है. पशुपालकों को नुकसान होता है.
वहीं इस दौरान पशुओं की प्रजनन क्षमता पर सर्दियों के मैनेजमेंट के असर के बारे में किसानों को शिक्षित करने के लिए एक सलाह सत्र आयोजित किया गया.
एक्सपर्ट ने पशुपालकों को बताया कि अगर पशुओं को सही डेयरी फार्म, संतुलित भोजन और समय पर स्वास्थ्य देखभाल नहीं दी जाती है, तो सर्दियों में ठंड का तनाव प्रजनन प्रदर्शन को दबा सकता है.
वहीं बांझपन से संबंधित समस्याओं को कम करने के लिए समय पर कृत्रिम गर्भाधान, नियमित डीवर्मिंग, टीकाकरण और बछड़ा पैदा होने के बाद की देखभाल के महत्व पर जोर दिया गया.
एक्सपर्ट ने पशुपालकों को अन्य जानकारियां भी दी. जैसे बताया कि पशुधन को नियमित रूप से साफ कपड़े या किसी ब्रश से साफ करना चाहिए.
सर्दियों के दौरान जानवरों के बाल नहीं काटने चाहिए. सर्दियों में जानवरों को ठंडे पानी से नहलाने से बचना चाहिए.
सर्दियों के दौरान जानवरों को अच्छा पौष्टिक और संतुलित आहार देना चाहिए. पौष्टिक आहार के तौर पर बरसीम, जो सबसे आसानी से उपलब्ध हरा चारा दे सकते हैं.
इसमें उच्च प्रोटीन का प्रतिशत और पानी की मात्रा होती है, दुधारू और बढ़ते जानवरों के उत्पादन स्तर को आसानी से बनाए रख सकता है.
इसलिए, किफायती उत्पादन के लिए कंसंट्रेट में प्रोटीन वाले इंग्रीडिएंट्स यानी केक की मात्रा कम की जा सकती है.
इस्तेमाल किए जाने वाले अलग-अलग तरह के केक का क्रम सरसों की खली, कपास के बीज की खली, मूंगफली की खली और सोयाबीन फ्लेक्स हो सकता है.
अगर हरे चारे की कमी है, तो बड़े जानवरों को खिलाने के लिए 25-30 किलो फलीदार चारे को 5-10 किलो गेहूं के भूसे के साथ मिलाया जा सकता है.
निष्कर्ष
एक्सपर्ट के बताए गए तरीकों पर पशुपालकों को गौर करना चाहिए, तभी पशुपालन के काम में फायदा हो सकता है, नहीं तो नुकसान हो जाएगा.












