नई दिल्ली. पशुओं को अगर बीमारियों से बचा लिया जाए तो काफी हद तक उत्पादन बेहतर लिया जा सकता है और इससे पशुपालन के काम में फायदा कई गुना बढ़ जाता है. बता दें कि सरकार पशुपालन को बढ़ावा देने का काम कर रही है. इस कड़ी में सरकार पशुओं के स्वास्थ्य को लेकर भी चिंतित है. सरकार की कोशिश है कि पशु स्वस्थ रहें और ज्यादा से ज्यादा दूध का उत्पादन करें. ताकि भारत दुनिया में दूध उत्पादन करने के मामले में अपनी स्थिति को और ज्यादा सुधार सके. जबकि इसका दूसरा फायदा ये है कि किसानों की इनकम भी बढ़ जाएगी. क्योंकि ज्यादा दूध का उत्पादन यानी ज्यादा कमाई.
इसी वजह से सरकार कई योजनाएं भी चला रही है. जिससे पशुपालन को बढ़ावा दिया जाए. वहीं बीमारियों पर कंट्रोल करने के लिए सरकार की तरफ से डायल 1962 मोबाइल वेटरनरी वैन की सुविधा भी बहुत दिनों से चल रही है. इसके तहत पशुओं के घर पर जाकर इलाज किया जाता है. ताकि पशु की समस्या ज्यादा गंभीर न हो और इससे पशुपालकों को नुकसान ना उठाना पड़े.
ऐसे काम करती है ये सुविधा
पशुपालन एवं डेयरी विभाग भारत सरकार के सहायक आयुक्त डॉ. दीप शंकर सेठ ने बताया कि सरकार की तरफ से बीमार पशुओं का इलाज करने की सुविधा दी जा रही है.
उन्होंने कहा कि इसके लिए एक टोल फ्री नंबर उपलब्ध कराया गया है. ये नंबर 1962 है. कोई भी पशुपालक इस टोल फ्री नंबर पर कॉल करके पशुओं का इलाज करा सकता है.
उन्होंने कहा कि सबसे पहले जब 1962 पर कॉल की जाएगी तो फोन उठाने वाला व्यक्ति पशु पालकों से पशु की समस्या के संबंधित बातचीत करेगा.
जरूरी चिकित्सकीय सलाह दी जाएगी. यदि समस्या का समाधान हो जाता है तो ठीक है नहीं तो मोबाइल वेटरनरी वैन पशुपालकों के दरवाजे तक पहुंचेगी. इसके बाद पशुओं का इलाज वहीं किया जाएगा. ताकि पशु सुरक्षित रह सके.
उन्होंने अपील की है कि ज्यादा से ज्यादा किसान भाई इस सुविधा का फायदा उठाएं और इस नंबर पर कॉल करके अपने पशु का जरूरत पड़ने पर इलाज करवाएं.
निष्कर्ष
इस सुविधा के शुरू होने से पशुओं का इलाज किया जा रहा है. इससे पशुओं की मामूली बीमारी गंभीर रूप नहीं ले रही है.












