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Disease: गलाघोंटू बीमारी से पीड़ित पशु की एक-दो दिन में हो जाती है मौत

जाफराबादी भैंस गुजरात के जूनागढ़, भावनगर और अमरेली जिलों में पाई जाती है.
प्रतीकात्मक तस्वीर।

नई दिल्ली. बीमारी कोई भी हो, अगर पशु हो जाए तो फिर इससे पशु की सेहत खराब होती है और उत्पादन पर असर पड़ता है. यदि मामला गंभीर है तो फिर पशु की जान भी चली जाती है. ऐसे में पशुपालक को बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ जाता है. इसलिए बीमारियों से बचाव करना बेहद ही जरूरी है. पशुओं की तमाम बीमारियों में गलाघोंटू बीमारी बेहद ही खतरनाक है. इसे हेमोरेजिक सेप्टिसीमिया भी कहा जाता है. एक्सपर्ट का कहना है कि गलघोंटू बीमारी उन स्थानों पर पशुओं में अधिक होती है, जहां पर बारिश का पानी इकट्ठा हो जाता है. इसके केस बारिश के बाद ज्यादा दिखाई देते हैं.

एक्सपर्ट का ये भी कहना है कि इस रोग के बैक्टीरिया गंदे स्थान पर रखे जाने वाले पशुओं तथा लंबी यात्रा या अधिक काम करने से थके पशुओं पर जल्दी हमला कर देते हैं. जबकि गंभीर बात ये भी है कि रोग का फैलाव बहुत तेजी से होता है. जिसका वक्त रहते इलाज न किये जाने पर पशुओं की मौत होने से पशुपालकों को बहुत नुकसान उठाना पड़ता है. इसलिए जरूरी है कि इस बीमारी का वक्त से इलाज किया जाए.

यहां इलाज, लक्षण के बारे में जानें
इस बीमारी में तेज बुखार आता है और दुधारू पशु का दूध उत्पादन अचानक से कम हो जाता है.

पशु की लार गिरने लगती है और नाक से पानी बहना शुरू हो जाता है. वहीं गले में बहुत ज्यादा सूजन आ जाती है.

इसके बाद पशु को सांस लेने में परेशानी होती है और पशु धुर पुर्र की आवाज निकालना शुरू कर देते हैं.

यदि एक बार इस तरह के लक्षण दिखने लगे तो फिर देर हो चुकी होती है और के 1-2 दिनों के अंदर पशुओं की मौत हो जाती है.

एक्सपर्ट का कहना है कि ज्यादातर मृत्यु अधिक आयु वाले बछड़ों व कम उम्र वाले वयस्कों में होती है.

रोकथाम की बात की जाए तो बीमार पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखना चाहिए. उनके दाना, चारा और पानी की अलग व्यवस्था करनी चाहिए.

बरसात के मौसम में ज्यादा पशुओं को एक जगह पर एकत्र होने से बचाना जरूरी होता है.

खासतौर पर 6 माह व उससे अधिक उम्र के सभी पशुओं को बरसात शुरू होने के पहले ही वैक्सीन देना चाहिए.

वहीं जब पशु को बुखार आए तो तुरंत इलाज कराएं. ऐसे में हो सकता है कि उसकी जान बच जाए.

संक्रमण की शुरुआती अवस्था में उपचार न करने पर मृत्यु दर 100 प्रतिशत पहुंच जाती है.

निष्कर्ष
ये बीमारी बेहद ही खतरनाक है, इसलिए वैक्सीन जरूर लगवाएं ताकि बीमारी से बचाव किया जा सके. यदि पशुपालन में फायदा कमाना है तो इस बीमारी से बचाव जरूरी है.

Written by
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