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Dairy: आम जनता के लिए बढ़ाए दूध के दाम पर पशुपालकों को नहीं मिल रहा इसका फायदा, जानें क्या है वजह

PEANUT, MILK, CIPHET, LUDHIANA
प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली. लगातार पड़ रही गर्मी के कारण पशुओं ने दूध उत्पादन कम कर दिया है. इसका असर अब दूध के दामों पर भी पड़ता दिखाई दे रहा है. आम जनता को वोटों की काउंटिंग के से दो दिन पहले झटका लगा है और अब 1 लीटर दूध लेने के लिए जनता को 75 रुपये खर्च करने होंगे. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक दूध की थोक कीमतों में 5 रुपये का इजाफा किया गया है, लेकिन हैरानी ये है कि इसका फायदा पशुपालकों को नहीं मिलेगा. कहने का मतलब ये है कि पशुपालक जिस रेट पर कंपनियों को दूध सप्लाई कर रहे थे उसी रेट पर उन्हें देना होगा.

गौरतलब है कि गर्मी ज्यादा पड़ रही है. इसके चलते दूध के प्रोडक्शन पर बेहद ही बुरा असर पड़ा है. इसके चलते जो डिमांड है वो ज्यादा है और आपूर्ति हो नहीं पा रही है. वहीं गुवाहाटी में दिबृहत्तर गुवाहाटी गौ पालक संगठन ने शनिवार से दूध के थोक मूल्य में 5 रुपए का इजाफा कर दिया है. यानि अब प्रति लीटर 5 रुपये की बढ़ोतरी की गई है. इसलिए अब दूध का नया थोक रेट 2 रुपए प्रति लीटर हो गया है वहीं शहर के बाजारों में खुदरा मूल्य लगभग 75 रुपये प्रति लीटर पर बेचा जा रहा है.

जनता पर पड़ेगा अतिरिक्त बोझ
दाम बढ़ाने पर तर्क दिया जा रहा है कि ये मजबूरी में उठाया गया कदम है. क्योंकि दूध का प्रोडक्शन कम हो रहा है, इसलिए इसे बढ़ाया गया है. आम जनता से बढ़े हुए दाम को बर्दाश्त करने की गुजारिश भी की गई है. हालांकि बढ़े हुए दाम के चलते आम जनता पर बुरा असर पड़ेगा. दूध के दाम बढ़ने से दूध से बनने वाले प्रोडक्ट भी महंगे हो जाएंगे. पनीर, दूध से बनने वाली मिठाइयां और लस्सी आदि भी अब पहले से ज्यादा दाम पर बिकने का अनुमान लगाया जा रहा है.

पशुपालकों को नहीं बढ़ाए दाम
हालांकि दूसरी ओर जहां कंपनियों ने दूध के दाम बढ़ा दिए हैं लेकिन इसका फायदा पशुपालकों को नहीं हो रहा है. क्योंकि पशुपालकों के दाम में इजाफा नहीं किया गया है. पहले​ जिस पुराने रेट पर उनसे दूध लिया जा रहा था, उसी रेट पर ले रहे हैं. जबकि दूसरी ओर तो महाराष्ट्र में दूध के दाम कम कर दिए गए हैं. इससे पशुपालकों को और ज्यादा नुकसान उठाना पड़ रहा है. कहां तो पशुपालक इससे फायदा उठाने के लिए पशुपालन करते हैं, कहां उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है.

पशुपालकों को डबल नुकसान
जबकि दूसरी ओर पशुपालकों के खर्चों पर गौर किया जाए तो वो बढ़ता ही जा रहा है. गर्मियों में चारे की कमी हो जाती है. हरा चारा महंगा हो जाता है. जबकि मिनरल​ मिक्सचर भी महंगा हो जाता है. जबकि ट्रांसपोर्टेशन का खर्च, वैक्सीनेश, बीमारी, हीट स्ट्रेस समस्या वैसे भी पशुपालकों को परेशान करती रहती है. इसके चलते पशुपालकों तो डबल नुकसान हो रहा है लेकिन उन्हें राहत नहीं मिल रही है.

Written by
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