नई दिल्ली. डेयरी पशुओं को खुरपका-मुंहपका बीमारी से बचाने का बेड़ा सरकार ने उठा रखा है. बिहार सरकार की तरफ से राज्य के अलग—अलग जिलों में पशुओं को वैक्सीन लगाई जा रही है. इसी कड़ी में नवादा जिले में केंद्र और राज्य सरकार की ओर से प्रायोजित योजना पशुपालन एनएडीसीपी के तहत खुरपका-मुंहपका एफएमडी रोग से बचाव के लिए दो फरवरी से छठा चरण बीस दिवसीय टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है. इस अभियान के तहत विभाग की ओर से गाय और भैंस वंश के पांच लाख आठ हजार पांच सौ पशुओं को टीका लगाने का लक्ष्य रखा गया है.
वहीं जिला पशुपालन पदाधिकारी डॉ. दीपक कुमार कुशवाहा के निर्देशन में अभियान में लगाए गए टीकाकर्मी पशुपालकों के घर-घर जाकर पशुओं को टीका लगाने में जुटे हैं. नोडल पदाधिकारी डॉ. श्रीनिवास ने बताया कि जिलेभर में निर्धारित टीकाकरण के लक्ष्य के अनुरूप 10 फरवरी मंगलवार तक अभियान के बारे में बताया कि टीकाकरण अभियान के लक्ष्य को पूरा करने के लिए हरेक प्रखंड में पशु चिकित्सा पदाधिकारी को प्रखंड नोडल पदाधिकारी बनाया गया है.
अब कितने पशुओं को लगी वैक्सीन
उन्होंने बताया कि अभियान को सफल बनाने के लिए 190 टीकाकर्मी को लगाया गया है. ताकि हर पशु को वैक्सीन लगाई जा सके.
विभाग की ओर से जिला मुख्यालय से लेकर हरेक प्रखंड में टीका का पर्याप्त बेज उपलब्ध करा दिया गया है.
अभियान में लगे टीकाकर्मी लक्ष्य को पूरा करने के लिए जुटे हैं. नौवें दिन जिलेभर में गाय वंश के एक लाख 12 हजार एवं भैंस वंश के 31 हजार पशुओं को एफएमडी का टीका लगाया जा चुका है.
जिले के रजौली प्रखंड की बात की जाए तो यहां भी इन दिनों खुरपका-मुंहपका मुंहपका रोग के विरुद्ध व्यापक टीकाकरण अभियान पूरी गति से चलाया जा रहा है.
पशुपालन विभाग द्वारा संचालित इस मुहिम के अंतर्गत नौ फरवरी 2026 तक प्रखंड के विभिन्न क्षेत्रों में चार माह से अधिक आयु की लगभग 15,200 गायों और भैंसों को सफलतापूर्वक टीकाकरण किया गया.
विभाग ने इस बार प्रखंड के कुल 50,000 पशुओं के टीकाकरण का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसे समय सीमा के भीतर पूरा करने के लिए स्वास्थ्य टीमें दिन-रात प्रयासरत हैं.
इस अभियान को सफल बनाने के लिए विभाग द्वारा 19 निजी टीकाकर्मियों की सेवाएं ली जा रही हैं.
ये टीकाकर्मी न केवल सुगम पंचायतों, बल्कि रजौली के चुनौतीपूर्ण पहाड़ी और मुश्किल क्षेत्रों में भी घर-घर जाकर पशुओं का फ्री टीकाकरण सुनिश्चित कर रहे हैं.
अभियान की कमान भ्रमणशील पशु चिकित्सा पदाधिकारी डा. रेषु कुमार के हाथों में हैं, जो नोडल पदाधिकारी के रूप में पूरी प्रक्रिया की निगरानी कर रहे हैं.
निष्कर्ष
गौरतलब है कि सरकार पशुओं को हर हाल में इस खतरनाक बीमारी से बचाना चाहती है. यही वजह है कि वैक्सीन लगाने का काम किया जा रहा है.












