नई दिल्ली. अप्रैल का महीना शुरू हो चुका है और दिन ब दिन गर्मी बढ़ रही है. खासतौर पर दोपहर का समय ज्यादा गर्म है. हालांकि रात में और सुबह ज्यादा गर्मी नहीं है. ऐसे में बढ़ती गर्मी से पशुओं को बचाना भी बेहद ही जरूरी है, ताकि पशुपालन में इससे नुकसान न हो. क्योंकि ज्यादा गर्मी की वजह से पशु बीमार भी पड़ जाते हैं. यदि ऐसा न भी हो तब भी पशु का उत्पादन प्रभावित होता ही है. उत्पादन पर असर पड़ जाने से पशुपालन के काम में पशुपालक भाई को नुकसान उठाना पड़ जाता है.
डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग (Dairy Fisheries and Animal Resources Department), पशुपालन सूचना एवं प्रसार कार्यालय, बिहार, पटना द्वारा अप्रैल के महीने में पशुपालकों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए, इसके बारे में जानकारी साझा की गई है. जिसके बारे में हर एक पशुपालक भाई को जानना चाहिए. ताकि पशुओं का ख्याल वो इस मौसम में अच्छी तरह से रख सकें.
इस महीने क्या करना चाहिए
इस माह में अधिक गर्मी की संभावना रहती है. पशुओं में पानी व मिनरल मिक्सचर की कमी हो जाती है.
भूख कम होना और कम उत्पादन अधिक तापमान के प्रमुख लक्षण हैं. इसलिए इससे पशुओं को इससे बचाने का प्रयास करें.
पशुओं को दोपहर में छाया वाले और हवादार स्थान पर रखना चाहिए. इससे उन्हें सुकून मिलता है.
पशुओं को ज्यादा पानी की जरूरत होती है. दिन में कम से कम चार बार ताजा पानी पिलायें. पानी साफ होना चाहिए.
भेड़ पालक, मेमनों में Sheep Pox (भेड़ चेचक) और एंटेरोटोक्सीमिया का टीका पशु चिकित्सक की सलाह से जरूर लगवायें.
पशुओं को बाहरी और आंतरिक परजीवी और मुर्गियों को कृमिनाशक दवा पशु चिकित्सक की सलाह से देना चाहिए.
इसके अलावा बाहरी परजीवी नाशक दवा का छिड़काव नियमित रूप से करना चाहिए.
पशुओं को संक्रामक रोग जैसे गलाघोंटू, ब्लैक क्वाटर (लंगड़ी रोग) के रोगरोधी टीके समय पर लगवाएं.
खरीफ में हरा चारा लेने के लिए ज्वार एवं मक्का की बुआई करें.
इस मौसम में पशुओं में लवण विशेषकर फॉस्फोरस की कमी के कारण ‘पाइका’ के लक्षण नजर आने लगते हैं.
इसके चलते पशु पेशाब, मिट्टी आदि चाटने या फिर पीने लगते हैं. इसलिए पशुओं को खनिज लवण मिश्रण अवश्य दें.
प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, खनिज, विटामिन सभी संतुलित मात्रा में प्राप्त करने के लिए पशुपालक अजोला घास का प्रयोग करें.
निष्कर्ष
अप्रैल के महीने में यदि पशुपालक भाई ये सारे काम करते हैं तो फिर पशुपालन में उन्हें नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा.










