नई दिल्ली. फरवरी का महीना ऐसा है कि इस दौरान दिन और रात में ठंड रहती है और दिन में धूप खिल जाती है. ऐसे में पशुओं की देखरेख में कुछ बदलाव किया जा सकता है लेकिन लापरवाही बरतना बेहद ही खतरनाक साबित हो सकता है. इसलिए बेहद ही एहतियात के साथ पशुओं का प्रबंधन करना चाहिए. दिन में हल्की ठंड पड़ने की वजह से कई बार पशुपालक कुछ गलती कर जाते हैं. जैसे सुबह और शाम को पड़ने वाली ठंड से बचाव के लिए इंतजाम नहीं करते हैं. जबकि इस वक्त की पड़ने वाली ठंड भी नुकसान पहुंचाती है.
ऐसे में पशुपालकों को जरूरी एहतियात बरतनी चाहिए. डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग (Dairy Fisheries and Animal Resources Department) पशुपालन सूचना एवं प्रसार कार्यालय, बिहार, पटना की ओर लाइव स्टॉक एनिमल न्यूज
(Livestock Animal News) को फरवरी के महीने में पशुओं का किस तरह से प्रबंधन करना है, इस बारे में अहम जानकारी दी गई है. ये जानकारियां हर एक पशुपालक के लिए अहम है. आइए इस बारे में डिटेल से जानते हैं.
क्या-क्या करना चाहिए, जानें यहां
इस माह में भी किसान भाइयों को अपने पशुओं को ठंड से बचाने के लिए जूट के चादरों या कम्बल से शरीर को ढकने का इंतेजाम करना चाहिए.
इस महीने में एक बदलाव जरूर करें कि पशुओं को दिन में धूप में रखें और रात में भी गर्म जगह पर रखने की व्यवस्था करें.
पशुओं को रात में ठंड न लगे. इसके लिए रात के समय पशुओं को सोने के लिए पुआल की व्यवस्था करें.
पशुओं, पशुशाला की सफाई बेहद ही जरूरी है. कई तरह की बीमारियों पर काबू पाने और बेहतर उत्पादन के लिए सफाई जरूरी है.
यहां तक कि पोल्ट्री फार्मर फार्म की सफाई नियमित रूप से करें. वहीं पोल्ट्री फार्म के बेडिंग को धूप दिखाएं.
इस महीने में ब्याने वाले पशुओं का विशेष ध्यान रखें. इसमें सबसे अहम ये है कि उनका शरीर गर्म रखना चाहिए.
ब्याने वाले पशुओं को उचित मात्रा में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, मिनरल्स, विटामिन से भरपूर भोजन देना चाहिए.
नवजात गाय, भैंस या भेड़ बकरियों को शरीर के अंदर वाले कीड़े परेशान करते हैं. कीड़े को मारने दवाएं पशु चिकित्सक की सलाह से नियमित रूप से दें.
बरसीम और जई की सिंचाई 12-14 और 18-20 दिनों के अन्तराल पर जरूर करना चाहिए. ताकि आगे चलकर चारे की कमी न हो.
पशुपालक अपने भेड़ एवं बकरी में पीपीआर का टीकाकरण कराएं. वहीं इस दौरान एफएमडी की वैक्सीन भी मुफ्त में लग रही है वो भी लगवा लें.












