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Green Fodder: हरा चारा उत्पादन को बढ़ावा देगी एमपी सरकार, दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए उठाया कदम

हरा चारा उत्पादन के लिए आयोजित वर्कशॉप में विचार रखते एक्सपर्ट.

नई दिल्ली. मध्य प्रदेश सरकार दूध उत्पादन को बढ़ाना चाहती है. इसी क्रम में हरा चारा उत्पादन और चारा आधारित उद्यमिता में अवसर व नवाचार पर मंथन के लिए पशुपालन एवं डेयरी विभाग की राज्य स्तरीय कार्यशाला पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा देवी अहिल्या सभागार, राज्य प्रशिक्षण संस्थान भोपाल में आयोजित की गई. इस वर्कशॉप में चारा क्षेत्र से जुड़े तीन प्रमुख वर्गों- चारा, साइलेज, फोडर ब्लॉक उद्यमी, उपभोक्ता तथा चारा बिक्री से जुड़े विभिन्न हितधारकों को आमंत्रित किया गया था. वर्कशॉप के दौरान साइलेज, हे-फोडर ब्लॉक और चारा बीज उत्पादन से जुड़े उद्यमियों, प्रगतिशील पशुपालकों, एफपीओ, सहकारी संस्थाओं एवं विशेषज्ञों की सहभागिता रही.

कार्यशाला में राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित संस्थाएं जैसे आईजीएफआरआई झांसी, वार्ना मिल्क यूनियन कोल्हापुर, बायफ, सीबीओ, एफपीओ, साइलेज निर्माण कंपनी कॉर्नेक्सट, दावत राइस सहित अन्य संस्थाएं शामिल हुईं. सभी हितधारकों ने अपने अनुभव साझा किए तथा चारा आधारित उद्यमों में व्यावसायिक संभावनाओं एवं प्रदेश में इनके व्यापक व्यवसायीकरण (कमर्शियलाइजेशन) पर विचार-विमर्श किया.

वर्कशॉप में कौन-कौन हुआ शामिल
इस कार्यक्रम के तहत दो पैनल सत्र आयोजित किए गए, जिनमें साईलेज-हे- चारा बीज उत्पादन एवं फॉडर ब्लॉक जैसे विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने अपने अनुभव, नवाचार एवं सुझाव साझा किए और प्रतिभागियों से संवाद किया.

प्रतिभागियों को तीन समूहों में विभाजित कर समूह चर्चा कराई गई. समूह-1 में प्रदेश में साइलेज व्यवसाय के विस्तार (स्केल-अप) की संभावनाओं पर चर्चा हुई.

इसमें साइलेज उत्पादक, उपभोक्ता एवं वितरकों के बीच संवाद हुआ. समूह-2 में चारा बीज उत्पादन पर चर्चा हुई.

इसमें बीज उत्पादक संस्थाओं एवं पशुपालकों शामिल हुए. समूह-3 में चारा ब्लॉक उत्पादन को लेकर विस्तार से चर्चा हुई. इसमें चारा प्रदायकर्ता, उपभोक्ता एवं वितरण प्रणाली पर चर्चा हुई.

कार्यशाला में मिले सुझावों एवं अनुशंसाओं के आधार पर विभाग द्वारा प्रदेश के लिए एक व्यापक एवं प्रभावी चारा विकास कार्ययोजना तैयार की जाएगी.

ताकि पशुपालकों को गुणवत्तापूर्ण चारा उपलब्ध हो सकेगा तथा चारा आधारित उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा.

प्रमुख सचिव पशुपालन एवं डेयरी उमाकांत उमराव, संचालक पशुपालन एवं डेयरी डॉ. पीएस पटेल, प्रिंसिपल साइंटिस्ट एवं प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर, आईजीएफआरआई झांसी डॉ. विजय कुमार यादव ने भी विचार रखे.

वहीं मध्यप्रदेश राज्य सहकारी डेयरी फेडरेशन लिमिटेड एवं पशुधन-कुक्कुट विकास निगम के प्रबंध संचालक, नाबार्ड, एपेक्स बैंक तथा ऊर्जा, पर्यावरण और जल परिषद नई दिल्ली के प्रतिनिधि उपस्थित रहे.

Written by
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