Home मछली पालन Fisheries: समुद्री शैवाल उत्पादन बढ़ाने के लिए 195 करोड़ रुपए की परियोजनाओं को सरकार ने दी स्वीकृति
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Fisheries: समुद्री शैवाल उत्पादन बढ़ाने के लिए 195 करोड़ रुपए की परियोजनाओं को सरकार ने दी स्वीकृति

समुद्री शैवाल की तस्वीर.

नई दिल्ली. देश में गत 10 वर्षों के दौरान वार्षिक मछली उत्पादन 2014-15 में 102.60 लाख टन से बढ़कर 2024-25 में 197.75 लाख टन तक पहुंच गया है. इसमें समुद्री मछली उत्पादन को 2014-15 में 35.69 लाख टन से बढ़ाकर 2024-25 में 46.15 लाख टन करना और अंतर्देशीय मछली उत्पादन को 2014-15 में 66.91 लाख टन से बढ़ाकर 2024-25 में 151.60 लाख टन करना शामिल है. इसी तरह, फिश एक्सोर्ट का मूल्य 2014-15 में 33 हजार 441.61 करोड़ रुपए से बढ़कर 2024-25 में 62 हजार 408.45 करोड़ रुपए हो गया है.

वहीं मत्स्यपालन विभाग, मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय द्वारा चलाई जा रही प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) अन्य बातों के अलावा समुद्री शैवाल (सी वीड़) कृषि के विकास पर ध्यान केंद्रित करती है. PMMSY के तहत, गत 5 वर्षों (2020-21 से 2024-25) के दौरान, मत्स्यपालन विभाग, भारत सरकार ने देश में समुद्री शैवाल उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से समुद्री शैवाल कृषि और संबद्ध गतिविधियों के लिए 195 करोड़ रुपए की परियोजनाओं को स्वीकृति दी है.

क्या-क्या काम हुए हैं
स्वीकृत परियोजनाओं में राफ्ट और मोनोलाइन की स्थापना, तमिलनाडु में कुल 127.71 करोड़ रुपये की लागत से एक बहुउद्देशीय समुद्री शैवाल पार्क की स्थापना शामिल है.

वहीं दादरा नगर हवेली और दमन और दीव के केंद्र शासित प्रदेशों में कुल 1.20 करोड़ रुपए की लागत से समुद्री शैवाल बीज बैंक की स्थापना शामिल थी.

इसके अलावा, प्रशिक्षण, अच्छी तरह से काम करने का आकलन, समुद्री शैवाल कृषि में क्षमता निर्माण सहित अनुसंधान और विकास को सुविधाजनक बनाने के लिए भी परियोजनाएं शुरू की गईं हैं.

PMMSY के केंद्रीय क्षेत्र (CS) घटक के तहत 7.21 करोड़ रुपए की परियोजनाओं को भी 100 फीसद केंद्रीय वित्तीय सहायता के साथ मात्स्यिकी अनुसंधान एवं विकास संस्थानों को स्वीकृत किया गया है.

भारत सरकार फिशरीज सेक्टर में अनुसंधान, निवेश और उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाओं और नीतियों को कार्यान्वित कर रही है.

इस तरह की पहलों के परिणामस्वरूप, विगत 10 वर्षों के दौरान भारत के समुद्री खाद्य निर्यात में काफी वृद्धि हुई है.

निर्यात बाजारों के विस्तार के लिए उक्त अवधि के दौरान अन्य महत्वपूर्ण उपलब्धियों में निर्यात गंतव्य 100 से 130 देशों तक बढ़ गए हैं.

वहीं निर्यातकों की संख्या 1,196 से बढ़कर 1,276 हो गई है. जबकि मूल्य वर्धित उत्पाद निर्यात तीन गुना बढ़कर 7,666.38 करोड़ रुपए हो गया.

प्रोसेसिंग क्षमता 25,707 एमटी प्रति दिन से बढ़कर 38 हजार 466 एमटी प्रति दिन हो गई.

मत्स्यपालन विभाग, मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) मत्स्य किसानों को गुणवत्तापूर्ण फिश सीड की आपूर्ति के लिए ब्रूडबैंक, हैचरी के विकास के लिए सहायता प्रदान करती है.

विगत पांच वर्षों के दौरान, PMMSY के अंतर्गत 30 ब्रूड बैंकों और 986 फिश हैचरी के लिए सहायता प्रदान की गई है.

इसके अलावा, PMMSY पर्ल कल्चर और क्लस्टर आधारित विकास के लिए भी सहायता दी गई है.

विभाग ने (i) झारखंड के हजारीबाग जिले में पर्ल क्लस्टर और (ii) मध्य प्रदेश के हलाली बांध में जलाशय मात्स्यिकी क्लस्टर को अधिसूचित किया है.

मात्स्यिकी विकास पहल, जिसमें क्लस्टर आधारित दृष्टिकोण भी शामिल है, वैकल्पिक आजीविका सहायता, वैल्यू एडिशन और मत्स्य उत्पादन, उत्पादकता और निर्यात में वृद्धि के लिए योगदान दे रही है.

Written by
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