नई दिल्ली. मध्य प्रदेश सरकार गौ पालन को बढ़ावा दे रही है और पशुओं का संवर्धन राज्य सरकार की प्राथमिकता है. जिसे देखते हुए बजट में 621 करोड़ रुपये की राशि के विशेष प्रावधान किए गए हैं. मध्य प्रदेश के पशुपालन एवं डेयरी विभाग के राज्यमंत्री लखन पटेल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव गौपालन को लेकर दूरदर्शी सोच रखते हैं. वो गौशालाओं आर्थिक रूप से मजबूत बनाना चाहते हैं. और निराश्रित गौवंश के व्यवस्थापन का स्थायी समाधान निकालने पक्ष में हैं. जिसके लिए गौ-संरक्षण और निराश्रित पशुओं के लिए ‘स्वावलंबी गौशाला कामधेनु स्थापना नीति-2025’ को मंजूरी दी गई है, जिसके तहत 5,000 से अधिक गायों वाली आत्मनिर्भर गौशालाएं स्थापित होंगी.
उन्होंने कहा कि वहीं पीएम मोदी के “आत्मनिर्भर भारत” के संकल्प को ग्रामीण अंचल तक पहुंचाने के उद़देश्य से लागू की गई ये नीति सिर्फ एक नीति नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक चेतना, आर्थिक दूरदर्शिता और सामाजिक उत्तरदायित्व का संगम भी होगी. यह न केवल मध्य प्रदेश में, बल्कि पूरे भारत में अपनी तरह की पहली और अद्वितीय योजना है. गाय को केन्द्र में रखते हुए यह नीति मील का पत्थर साबित होगी.
130 जमीन गौशालाओं को दी जाएगी
इस नीति के तहत मध्य प्रदेश सरकार पंचगव्य, बायोगैस, जैविक खाद, नस्ल सुधार दूध प्रोसेसिंग आदि के क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियों के संचालन हो सकेगा.
वहीं परियोजनाओं की स्थापना के लिए निवेशकों को 5000 गौवंश के लिये अधिकतम 130 एकड़ भूमि उपयोग के लिए दी जाएगी.
इसके अलावा हर 1000 गौवंश की वृद्धि पर 25 एकड़ अतिरिक्त भूमि की पात्रता होगी.
इसके अलावा मध्य प्रदेश सरकार द्वारा निराश्रित गौवंश के व्यवस्थापन के लिए लगभग 3000 से अधिक गौशालाओं में 4 लाख 75 हजार से अधिक निराश्रित गौवंश को आश्रय दिया गया है.
गौशालाओं में निराश्रित गौवंश के लिए और बेहतर व्यवस्थाएं उपलब्ध की जा सकें, इसके लिए गौशालाओं दी जाने वाली अनुदान को राशि को 20 रुपये प्रतिदिन/गौवंश से बढ़ाकर 40 प्रतिदिन/गौवंश किया गया है.
इसके तहत राज्य शासन द्वारा गौशालाओं के अनुदान के बजट को 250 करोड़ रुपये प्रति वर्ष से बढ़ाकर 505 करोड़ रुपये कर दिया गया है.
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का स्पष्ट संदेश है कि गौ रक्षा केवल संवेदना नहीं, सशक्तिकरण का साधन बननी चाहिए.
इसी उद्देश्य के साथ मध्य प्रदेश गौवंश वध प्रतिषेध (संशोधन) विधेयक, 2024 को भी लागू किया गया है.
इसके तहत प्रदेश में गौवंश वध प्रतिषेध अधिनियम 2004 (संशोधित 2010) को और ज्यादा सख्त करते हुए मध्य प्रदेश गौवंश वध प्रतिषेध (संशोधन) अधिनियम 2024 में गौवंश के अवैध परिवहन में प्रयुक्त वाहन को राजसात (Confiscation) करने का प्रावधान किया गया.










