नई दिल्ली. फिशरीज सेक्टर में कमाई का परंपरागत तरीका शिकारमाही यानी मछली पकड़ना है. जिसके जरिए मछुआरे नदियों, झीलों और जलाशयों से मछली पकड़ने का काम करते हैं. इसी मछली पकड़ने के काम से मछुआरे अपनी आजीविका चलाते हैं. वे अपना और अपने परिवार का भरण पोषण इसी काम के जरिए करते हैं. हालांकि साल में कुछ वक्त ऐसा भी आता है कि जब शिकारमाही यानी मछली पकड़ने के इस काम पर सरकार की तरफ से रोक लगा दी जाती है. इसके पीछे वजह भी बेहद ही वाजिब भी है. जिसे मछुआरों को मानना होता है लेकिन इस दौरान उन्हें आर्थिक परेशानी से भी जूझना पड़ता है.
बता दें कि आमतौर पर सरकार की तरफ से जून, जुलाई और अगस्त के महीना में इस रोक को लागू किया जाता है, क्योंकि ये समय मछली के प्रजनन का माना जाता है. इस दौरान मछलियां अंडे देती हैं. जिससे प्राकृतिक जल स्रोत में मछलियों की संख्या बढ़ती है. वहीं अगर इस दौरान मछली पकड़ने का काम जारी रहता है तो इससे छोटी मछलियां भी पकड़ी जाती हैं. इससे मछलियों के उत्पादन पर असर पड़ेता है. जिसके चलते सरकार शिकारमाही पर रोक लगा देती है.
सरकार ने दिये निर्देश
हालांकि इस दौरान सरकार की तरफ से शिकारमाही पर निर्भर रहने वाले मछुआरों को आर्थिक रूप से मदद पहुंचाने का काम भी किया जाता है.
ये रोक अलग-अलग राज्यों में लगती है. बिहार भी उन्हीं राज्यों में से एक है जहां पर इस दौरान मछली पकड़ने पर रोक रहती है.
जिसको देखते हुए बिहार की सरकार ने डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग को निर्देशित किया है कि वह मछुआरों को ऐसे समय में राहत पहुंचाएं.
सरकार के निर्देश पर डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग की ओर से राहत सह बचत योजना की शुरुआत की गई है.
क्या है राहत-सह-बचत योजना
मत्स्य शिकारमाही के प्रतिषेध महीनों में वित्तीय राहत पहुंचाने के उद्देश्य से प्रत्येक मछुआरों को वार्षिक तौर पर 1500 रुपए का अंशदान सरकार की तरफ से दिया जाएगा.
साथ ही राज्य सरकार एवं केन्द्र सरकार के द्वारा भी 1500-1500 रुपए का वार्षिक अंशदान प्रत्येक मछुआरों को प्रदान किया जायेगा.
अर्जित सूद सहित संचित मूल राशि को संबंधित मछुआरा को मत्स्य शिकारमाही प्रतिषेधित महीनों में उपलब्ध कराया जायेगा.
क्या है योजना का मकसद
राज्य के नदियों में मछली का शिकारमाही करने वाले गरीबी रेखा के नीचे के मछुआरों को प्रतिषेध महीनो मे राहत पहुंचाना हैं.
इस योजना के सफल तौर पर लागू होने पर प्रतिषेध अवधि में प्रजनक मछलियों को प्रजनन करने का अवसर मिलेगा.
जिससे नदियो में मत्स्य बीज का स्वतः संचयन हो पाएगा एवं मछलियों के उत्पादन एवं उत्पादकता में इजाफा किया जा सकेगा.












