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NDDB प्रतिस्पर्धी बाजार में डेयरी कोऑपरेटिव्स को बेहतर बनाने के लिए अफसरों सिखा रहा मार्केटिंग

बैठक में एनडीडीबी के चेयरमैन व अन्य अफसर.

नई दिल्ली. हर घर तक अच्छी क्वालिटी का दूध और डेयरी उत्पाद पहुंचे और इसका फायदा उत्पादन करने वाले किसानों को सीधे तौर पर मिले. इसके लिए लिए मार्केटिंग बेहद जरूरी है. मार्केटिंग के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) डेयरी सेक्टर को और ज्यादा मजबूत बनाना चाहती है. इसी कड़ी में अफसरों को प्रतिस्पर्धी बाजार में डेयरी कोऑपरेटिव्स को बेहतर बनाने के तमाम गुर सिखाए जा रहे हैं. बता दें कि NDDB की ओर से आनंद में अपने अधिकारियों के लिए एक सेल्स और मार्केटिंग वर्कशॉप आयोजित कर रहा है. जिसका मकसद यही है.

NDDB के चेयरमैन डॉ. मीनेश सी. शाह ने इस वर्कशॉप का उद्घाटन किया है और डेयरी कोऑपरेटिव्स के लिए सेल्स और मार्केटिंग पर एक हैंडबुक जारी की है. यह कार्यक्रम NDDB के उन प्रयासों का हिस्सा है जिनका मकसद अपने अधिकारियों में सेल्स और मार्केटिंग का व्यावहारिक ज्ञान बढ़ाकर उनकी मार्केटिंग समझ को मज़बूत करना है.

चुनौतियों से पार पाने के लिए जागरुकता जरूरी
इसका उद्देश्य अधिकारियों में मार्केटिंग की सोच विकसित करना, व्यावसायिक कार्यों की समझ को गहरा करना है. और बाजार से जुड़ी चुनौतियों के प्रति जागरूकता पैदा करना है.

इस ट्रेनिंग में सेल्स, डिस्ट्रीब्यूशन, मार्केटिंग, ब्रांड बिल्डिंग और उपभोक्ता व्यवहार की बुनियादी बातें शामिल हैं.

जिससे अधिकारी एक प्रतिस्पर्धी बाज़ार में डेयरी कोऑपरेटिव्स को बेहतर सहयोग देने के लिए तैयार हो सकें.

अपने संबोधन में, NDDB के चेयरमैन ने इस बात पर जोर दिया कि मार्केटिंग हमेशा से ही डेयरी क्षेत्र की आधारशिला रही है. ये डॉ. वर्गीज कुरियन के दृष्टिकोण को दर्शाता है.

उन्होंने गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (अमूल) की सफलता का उदाहरण दिया, जहाँ मार्केटिंग पर मज़बूत फोकस निर्णायक साबित हुआ.

भविष्य की ओर देखते हुए, डॉ. शाह ने इस बात पर जोर दिया कि जैसे-जैसे भारत वैश्विक डेयरी क्षेत्र में अपनी पैठ बढ़ाना चाहता है, प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए मार्केटिंग अत्यंत महत्वपूर्ण होगी.

किसानों के कल्याण के प्रति NDDB की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रभावी मार्केटिंग प्रणालियों को अपनाकर दूध उत्पादकों को बेहतर मूल्य और अधिक फायदा पहुंचाना चाहिए.

हैंडबुक के लिए लिखे अपने प्रस्तावना में डॉ. शाह ने इस बात पर जोर दिया है कि उत्पादकों के लाभ को अधिकतम करने के लिए पूरी ‘वैल्यू चेन’ (मूल्य श्रृंखला) को अनुकूलित करना आवश्यक है.

जिसमें मार्केटिंग एक प्रमुख चालक की भूमिका निभाती है। उन्होंने कोऑपरेटिव्स से आह्वान किया है कि वे पेशेवर मार्केटिंग संगठनों के रूप में कार्य करें.

जिन्हें कुशल कार्यबल, मज़बूत वितरण प्रणाली और ब्रांड बिल्डिंग द्वारा संचालित किया जाए। यह हैंडबुक, जो ज़मीनी अनुभवों और केस स्टडीज पर आधारित है.

कोऑपरेटिव्स को आधुनिक कार्यप्रणालियों को अपनाने में सहायता करती है, साथ ही उनके सहकारी मूल्यों को भी अक्षुण्ण बनाए रखती है.

Written by
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