Home पशुपालन Animal News: पुआल, सूखी घास और गेहूं के भूसे से तैयार करें पशु का बिस्तर, 2 से 6 इंच रखें मोटाई
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Animal News: पुआल, सूखी घास और गेहूं के भूसे से तैयार करें पशु का बिस्तर, 2 से 6 इंच रखें मोटाई

ठंड से बचाने के लिए इंतजाम करता पशुपालक.

नई दिल्ली. उत्तर भारत में मौसम में बहुत ज्यादा बदलाव होता है, दिसंबर और जनवरी महीनों में कभी-कभी तापमान शून्य डिग्री के करीब भी चला जाता है. गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी के पशुधन उत्पादन प्रबंधन विभाग के प्रमुख डॉ. यशपाल सिंह ने बताया कि इस मौसम में तीन बातों पर बहुत ध्यान देने की जरूरत है, जैसे सही शेल्टर प्रबंधन के माध्यम से पर्यावरण में बदलाव, पोषण प्रबंधन के माध्यम से शरीर के भंडार में सुधार और उचित स्वास्थ्य देखभाल. अगर ये काम लिया गया तो पशुओं की हिफाजत भी हो जाएगी और उनसे बेहतर उत्पादन भी लिया जा सकेगा.

जानवरों के स्तर पर हवा के बहाव को रोकने के लिए लूज हाउसिंग सिस्टम के शेड में पर्दे का इस्तेमाल किया जाना चाहिए. पर्दे तिरपाल, बांस, सूखी घास, धान के पुआल, बोरी, जूट आदि से बनाए जा सकते हैं. शेड के चारों ओर छायादार पेड़ों की छंटाई करनी चाहिए ताकि शेड में सूरज की रोशनी आ सके, जिससे न केवल गर्मी मिलेगी बल्कि अल्ट्रावायलेट किरणों की क्रिया से जानवरों के घरों को कीटाणु रहित भी किया जा सकेगा.

ये काम भी जरूर करें पशुपालक
डॉ. यशपाल सिंह का कहना है कि इसके अलावा, जानवरों को दिन के समय खुले बाड़ों में सीधे धूप में रहने देना चाहिए. जानवरों के शेड और उनके फर्श लंबे समय तक गीले और ठंडे नहीं रहने चाहिए.

इससे जानवरों, खासकर छोटे जानवरों को निमोनिया, बुखार, कोक्सीडियोसिस, दस्त जैसी कई बीमारियाँ हो सकती हैं और गंभीर मामलों में मौत भी हो सकती है.

वो सुझाव देते हैं कि पक्के (कंक्रीट) फर्श पर बड़े जानवरों के लिए 4-6 इंच और छोटे जानवरों के लिए 2 इंच की गहराई तक उपयुक्त बिस्तर बिछाना चाहिए. क्योंकि ठंडे फर्श के सीधे संपर्क में आने से पशुओं को ठंड लगने का खतरा बढ़ जाता है.

धान का पुआल, सूखी घास, गेहूं का भूसा, लकड़ी का बुरादा, चावल का छिलका आदि का इस्तेमाल बिस्तर सामग्री के रूप में किया जा सकता है.

बोरी से बने झूल (कपड़े) का इस्तेमाल बड़े जानवरों को अत्यधिक ठंड के दौरान इन्सुलेशन और गर्मी प्रदान करने के लिए भी किया जा सकता है.

सर्दियों के दौरान अच्छा वेंटिलेशन सुनिश्चित किया जाना चाहिए. कचरे के उचित निपटान और अमोनिया गैसों के कम से कम जमाव के लिए शेड को दिन में कम से कम दो बार साफ किया जाना चाहिए.

निष्कर्ष
अगर आप ये काम करते हैं तो पशुपालन में पशुओं को ठंड से होने वाली परेशानियों से काफी हद तक बचा पाएंगे. इसका फायदा आपको पशुपालन के काम में मिलेगा.

Written by
Livestock Animal News Team

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