नई दिल्ली. इन दिनों भीषण ठंड पड़ रही है और कोहरा भी छाया रह रहा है. ऐसे में मछली पालकों को पहले के मुकाबले ज्यादा होशियार रहने की जरूरत है. क्योंकि कोहरा मछली पालन में बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है. क्योंकि कोहरे से मछलियों को ऑक्सीजन की कमी हो जाती है. इससे उनमें मृत्यु दर भी दिखाई देती है. वहीं अगर ऐसा ना भी हो तब भी नुकसान होता है. कोहरा मछलियों की ग्रोथ में रुकावट का कारण बनता है. वहीं कोहरे के दिनों में मछलियों को अल्सर, पंखों के सड़ने जैसी रोगों से भी जूझना पड़ता है, जो हर तरह से मछली पालन के लिए नुकसानदेह साबित होता है.
भारत सरकार के मछली पालन विभाग के एक्सपर्ट का कहना है कि धूप न निकलने की वजह से तालाब में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है. इससे मछलियों को सांस लेने में भी दिक्कत आती है. ऐसे में मछलियां कमजोर हो जाती हैं और बीमार पड़कर मरने लगती हैं. हालांकि जब कोहरा ज्यादा पड़ने लगे तो कुछ उपाय करके इन समस्याओं से निजात पाई जा सकती है और मछलियों की बेहतर ग्रोथ लेकर मछली पालन के काम में फायदा भी उठाया जा सकता है.
क्या उपाय करें, जानें यहां
एक्सपर्ट का कहना है कि जब कोहरा पड़ने लगे तब तालाब में कार्प मछलियों के लिए 5 से 6 फीट और रोहू मछली के लिए 8 से 10 फीट पानी का स्तर बनाए रखें.
वहीं इन दिनों ऑक्सीजन की कमी से बचने की जरूरत है. साथ ही पानी की गुणवत्ता बनाए रखने की भी जरूरत है. इसके लिए आप तालाब में 10 से 20 फीसद हर दिन ताजा पानी जरूर डालें.
कोहरे के चलते होने वाली बीमारियों से बचाव करने के लिए 40 से 50 किलोग्राम एक एकड़ में नमक का इस्तेमाल करें. या फिर बीकेसी 1 लीटर प्रति एकड़ में इस्तेमाल किया जा सकता है. इससे परजीवी और फंगस दोनों से बचा जा सकता है.
मछली पालक इस बात का ध्यान रखें कि कोहरे और कम तापमान में किसी भी तरह की खाद, गोबर, चूना आदि का छिड़काव ना करें. क्योंकि इससे पानी की गुणवत्ता और ज्यादा खराब होती है. मछलियों को नुकसान होने लगता है.
मछलियों की फीड खाने की क्षमता इस दौरान कम हो जाती है. इसलिए फीड की मात्रा पर भी ध्यान दें. ज्यादा फीड न डालें. क्योंकि ज्यादा फीड डालने से आपके मछली पालन की लागत बढ़ेगी. जबकि इससे तालाब में प्रदूषण भी बढ़ता है.
निष्कर्ष
यदि आप इन बातों पर ध्यान देते हैं तो कोहरे में मछली पालन को होने वाले नुकसान से बचा सकते हैं. जिसका फायदा आपको मछली पालन में मिलेगा.











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