नई दिल्ली. मौसम में तेजी से बदलाव हो रहा है और ठंड के दिन गर्मियों में बदल रहे हैं. ऐसे में पशुपालकों को सावधान हो जाना चाहिए. बिहार सरकार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग (Department of Fisheries, Government of India) के एक्सपर्ट ने लाइव स्टॉक एनिमल न्यूज (Livestock Animal News) को बताया कि मार्च के महीने में पशुपालकों का सही से ख्याल रखना चाहिए. क्योंकि इस दौरान पशुओं के बीमार पड़ने का भी खतरा रहता है. जिससे उत्पादन प्रभावित हो सकता है और पशुपालकों को नुकसान हो सकता है.
मार्च के महीने में पशुओं को गर्मी से होने वाले रोग हो सकते हैं. ऐसे में पशुपालकों को गर्मी से होने वाली बीमारियों से सावधानी बरतनी चाहिए. क्योंकि पशु को बीमारी हो गई तो फिर पशुपालन की लागत बढ़ जाती है और इसके चलते भी पशुपालन के काम में मुनाफा घट जाता है यह कहीं ना कहीं एक तरह का नुकसान ही है.
कौन सही बीमारियां हो सकती हैं
गर्मी के दौरान पशुओं को हीट स्ट्रेस का सामना करना पड़ता है. उनके मुंह से लार टपकने लगती है और दूध के उत्पादन में कमी आ जाती है.
एक्सपर्ट कहते हैं गर्मियों में थनों में सूजन और संक्रमण का खतरा भी बहुत ज्यादा बढ़ जाता है. इसे थनैला रोग कहते हैं.
जबकि गर्मी के दिनों में ही पशुओं के पाचन तंत्र पर भी असर पड़ता है. जिससे पेट की गैस बन सकती है. वहीं उनके शरीर पर दाना और सूजन भी आ सकती है.
कीड़ों से भी हो जाएं सावधान
एनिमल एक्सपर्ट का कहना है कि इसी महीने में मच्छर, मक्खी आदि की समस्या भी बहुत ज्यादा बढ़ जाती है.
इसलिए जरूरी दवाओं का इस्तेमाल करके इन पर नियंत्रण करना बेहद जरूरी हो जाता है. क्योंकि इससे पशुओं को परेशानी होती है.
एक्सपर्ट का यह कहना है कि मच्छर, मक्खी और बाहरी परजीवियों को नियंत्रित करने के लिए पशु चिकित्सक के परामर्श पर ही दवाओं का छिड़काव करना चाहिए.
दूध उत्पादन भी घट जाता है
मार्च का महीना एक ऐसा महीना है कि जब इस दौरान दूध के उत्पादन में भी कमी हो सकती है. क्योंकि दिन में गर्मी बढ़ जाती है.
ऐसे में पशुओं के पोषण का सही तरह से ख्याल रखना चाहिए. उन्हें पोषण से भरपूर डाइट देनी चाहिए.
जरूरत पड़ने पर पशु चिकित्सक से सलाह लेकर जरूरी जांच करवाएं और हो सके तो दूध, पेशाब और खून की जांच करवा लेना चाहिए.
निष्कर्ष
एक्सपर्ट के मुताबिक मार्च के महीने में इन बातों का ख्याल रखना बेहद ही जरूरी है. इससे पशुओं की सेहत सही रहेगी और फिर उनसे उत्पादन भी बेहतर लिया जा सकता है.












