नई दिल्ली. गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी, लुधियाना को अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) द्वारा स्थापित पार्टनरशिप्स फॉर एक्सीलरेटेड इनोवेशन एंड रिसर्च (PAIR) कार्यक्रम के माध्यम से एक प्रतिष्ठित रिसर्च ग्रांट मिली है. PAIR कार्यक्रम एक लचीले हब-एंड-स्पोक मॉडल का उपयोग करता है जो उभरते संस्थानों को प्रमुख रिसर्च केंद्रों से जोड़कर मेंटरशिप और सहयोगी इनोवेशन को बढ़ावा देता है. ये संस्थान एक बहु-विषयक रिसर्च कंसोर्टियम बनाएंगे जिसे. “लगातार कृषि, स्वास्थ्य, ऊर्जा और पर्यावरण के लिए टेक्नोलॉजी का कंसोर्टियम” कहा जाएगा. ये ग्रांट वेट यूनिवर्सिटी की ट्रांसलेशनल रिसर्च और इनोवेटिव विकास में अग्रणी बनने की यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है.
वाइस चांसलर डॉ. जतिंदर पॉल सिंह गिल ने इसपर बधाई दी और कहा कि यह ग्रांट न केवल रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करेगा बल्कि पशु स्वास्थ्य, खाद्य इनोवेशन और सतत स्वास्थ्य देखभाल प्रौद्योगिकियों में महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना करने में विश्वविद्यालय की भूमिका को भी मजबूत करेगा.
इन विषयों पर होगा रिसर्च
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ये परियोजनाएं राष्ट्रीय विकास में महत्वपूर्ण योगदान देंगी और वैश्विक वैज्ञानिक चर्चाओं को आगे बढ़ाएंगी.
उन्होंने फैकल्टी और वैज्ञानिक कर्मचारियों से उत्कृष्टता हासिल करने, इनोवेशन को बढ़ावा देने और उन मूल मूल्यों को बनाए रखने का भी आग्रह किया.
जिन्होंने वेट यूनिवर्सिटी को पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान में एक अग्रणी संस्थान के रूप में स्थापित किया है.
रिसर्च निदेशक डॉ. प्रकाश सिंह बरार ने बहुत गर्व व्यक्त किया और प्रतिष्ठित रिसर्च ग्रांट हासिल करने के लिए विश्वविद्यालय के फैकल्टी और शोधकर्ताओं की सराहना की.
उन्होंने खुशी व्यक्त की कि कंसोर्टियम में वेट यूनिवर्सिटी की भागीदारी रिसर्च यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है.
PAIR ANRF कार्यक्रम के लिए कुल 90.53 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है, जिसमें से वेट यूनिवर्सिटी को 4.08 करोड़ रुपये की ग्रांट मिलेगी.
पहला प्रोजेक्ट, “पशुधन स्वास्थ्य की निगरानी, उत्पादन को बेहतर बनाने और स्थिरता में सुधार के लिए AI/ML-सक्षम सिस्टम,” का नेतृत्व डॉ. देवेंद्र पाठक, डॉ. सिख तेजिंदर सिंह और डॉ. नवदीप सिंह कर रहे हैं.
इसका मकसद पशुधन स्वास्थ्य की निगरानी में सुधार, उत्पादकता बढ़ाने और टिकाऊ पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग का इस्तेमाल करना है.
दूसरा प्रोजेक्ट, “नए खाद्य उत्पाद विकास के लिए गैर-थर्मल तकनीकों के माध्यम से प्रोटीन के कार्यात्मक गुणों को बढ़ाना है.
मॉडलिंग, इन विट्रो मूल्यांकन और मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव,” में डॉ. सुनील कुमार, डॉ. रेखा चावला, डॉ. अंजू बूरा खटकर और डॉ. नरेंद्र कुमार चंदला शामिल हैं.
यह स्वास्थ्य लाभ वाले नए खाद्य उत्पादों के लिए प्रोटीन की कार्यक्षमता को बढ़ाने के लिए गैर-थर्मल प्रोसेसिंग तरीकों की खोज पर केंद्रित है.
तीसरा प्रोजेक्ट, “हेल्थकेयर टेक्नोलॉजी में उपयोग के लिए बायोडिग्रेडेबल बायोमटेरियल का विकास,” का नेतृत्व डॉ. मनु एम और डॉ. कुलदीप गुप्ता कर रहे हैं.
इसका मकसद चिकित्सा और स्वास्थ्य देखभाल उपयोगों के लिए पर्यावरण के अनुकूल बायोमटेरियल बनाना है, जो वैश्विक स्थिरता प्रयासों का समर्थन करेगा.











