नई दिल्ली. दुधारू पशुओं से उनकी क्षमता के मुताबिक दूध उत्पादन लेने के लिए कई बातों का ख्याल रखना पड़ता है. जैसे दुधारू पशुओं को कब क्या खिलाना चाहिए? कितना खिलाना चाहिए? इस बात की जानकारी होना एक पशुपालक के तौर बेहद अहम है. क्योंकि पशु जब सही से खाए पीएगा और उसकी जरूरत के मुताबिक उसे चारा दाना पानी मिलेगा तभी वह ठीक मात्रा में दूध का उत्पादन करेगा. जबकि इससे डेयरी फार्मिंग का बिजनेस अच्छी तरह से चलता रहेगा. इसके उलट अगर पशु के खान-पान में कमी की जाती है तो इससे दूध उत्पादन में भी कमी आ सकती है.
बिहार सरकार के डेयरी मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग (Dairy Fisheries and Animal Resources Department) के एक्सपर्ट का कहना है कि पशुओं के लिए जितना जरूरी हरा चारा, कैल्शियम और सूखा चारा आदि चीजें हैं, उसी तरह से नमक भी जरूरी है. पशुओं के शरीर में जरूरी मात्रा में नमक जाना चाहिए. नहीं तो इसका भी असर दूध उत्पादन पर पड़ता है. पशुओं को संतुलित मात्रा में नमक देने से जहां दूध उत्पादन बढ़ता है. वहीं नमक की कमी होने से दूध उत्पादन घट भी सकता है.
नकम देने के फायदे क्या हैं
एक्सपर्ट का कहना है कि पशुओं को नमक खिलाने से उनकी भूख बढ़ जाती है. इस वजह से पशु हर एक चीज को अच्छी तरह से खाते हैं.
वहीं नमक खिलाने का दूसरा एक फायदा ये भी है कि पशुओं का पाचन तंत्र सुधर जाता है. इस वजह से पशु जो कुछ भी खाते हैं. वह उनके शरीर में लगता है और इसका फायदा मिलता है.
नमक खाने की वजह से पशुओं को भूख ज्यादा लगती है. उनका पाचन सुधरता है और इसके चलते दूध उत्पादन भी बढ़ जाता है.
नमक देने से पशुओं का शरीर ठीक रहता है. उनके शरीर में पानी व खनिजों का संतुलन बना रहता है. जिससे मांसपेशियां और नसें ठीक काम से करती हैं.
नमक की कमी से पशु मिट्टी कपड़े या मल मूत्र चाटने लगते हैं. उन्हें भूख कम लगती है. वजन घट जाता है और कमजोरी होने से दूध उत्पादन में कमी आती है.
दुधारू पशु को हर दिन 100 से 150 ग्राम नमक देना चाहिए. जबकि बछड़े या बछड़ियों को एक चुटकी नमक दिया जा सकता है.
यदि आपके बाड़े में देसी गाय या भैंस पली है तो उन्हें 30 से 50 ग्राम से ज्यादा नमक नहीं देना चाहिए.
निष्कर्ष
आप पशुओं उनके चारे आदि में मिलाकर नमक को खिलाते हैं तो इसका फायदा दूध उत्पादन के तौर पर आपको मिलेगा और इससे डेयरी फार्मिंग का बिजनेस मुनाफे वाला बन जाएगा.












