नई दिल्ली. केंद्र सरकार हो या फिर तमाम राज्यों की सरकारें किसानों की इनकम को दोगुना करने की कोशिश में लगी हुई हैं. ताकि किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार हो सके. इसके लिए पशुपालन के काम को बढ़ावा देने का काम सरकार की तरफ से किया जा रहा है. सरकार की कोशिश है कि हर एक किसान पशुपालन के काम में भी आगे आए ताकि उसके पास कृषि के अलावा एक दूसरा काम भी हो. ताकि उनकी आर्थिक स्थिति सही रहे. वहीं जो भी किसान भाई पशुपालन कर रहे हैं उन्हें इसका फायदा भी मिल रहा है.
वहीं सरकार पशुपालन और डेयरी व्यवसाय को बढ़ाव देने के लिए हजारों करोड़ रुपए खर्च कर रही है. जैसे बिहार सरकार को देख लें तो सरकार हर साल हजारों करोड़ रुपए डेयरी किसानों को दे रही है. बिहार सरकार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग की ओर से बताया गया कि उनकी संस्था कॉम्फेड हर साल तीन हजार करोड़ रुपए का भुगतान डेयरी किसानों को कर रही है.
डेयरी किसानों को मिल रहा है बड़ा फायदा
डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग की संस्था कॉम्फेड से बिहार के डेयरी किसानों को सालाना करीब 3 हजार करोड़ रुपये का भुगतान किया जा रहा है.
करीब 14 हजार लोगों को प्रत्यक्ष और 7 लाख लोगों को अप्रत्यक्ष मिला है. आने वाले 5 वर्षों में 24 हजार प्रत्यक्ष और 21 लाख अप्रत्यक्ष रोजगार देने का लक्ष्य रखा गया है.
मौजूदा वक्त में इसका सालाना कारोबार 6,226 करोड़ रुपये है, इसे बढ़ाकर 10,000 करोड़ रुपये करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है.
वहीं दुबई, वियतनाम, दक्षिण अफ्रीका आदि देशों में दूध के उत्पाद भेजने की तैयारी है. कॉम्फेड के उत्पादों में दूध, घी, पनीर, दही, मिल्क भेजे जाएगा.
सरकार ने बताया कि पाउडर, आइसक्रीम, गुलाबजामुन, रसगुल्ला, पेड़ा, बालुशाही, राबड़ी, लस्सी आदि इन देशों में भेजे जाने वाले प्रोडक्ट की लिस्ट में शामिल है.
गाय का घी, बेकरी प्रोडक्टस, टेट्रा पैक मिल्क शेक, छांछ, लस्सी और जूस सहित प्रीमियम मिठाइयां एवं स्नैक्स आदि भी बाजार में उतारे गये हैं.
असल में सुधा के उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतारने और इसके जरिए किसानों को फायदा पहुंचाने के लिए अमेरिका, दुबई, वियतनाम, दक्षिण अफ्रीका में बेचने की तैयारी चल रही है.
बीते वर्ष अमेरिका और कनाडा में घी एवं गुलाब जामुन भेजकर इसकी शुरुआत की जा चुकी है. कॉम्फेड की ओर से हर दिन 30 लाख लीटर दूध का कलेक्शन किया जा रहा है.
इसके लिए 14 हजार को प्रत्यक्ष और सात लाख लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मुहैया कराने का काम किया जा रहा है.










