नई दिल्ली. राजस्थान सरकार की तरफ से मकर संक्राति के अवसर पर पतंगबाजी को लेकर जिलों को एडवायजरी जारी की गई है. ताकि पशु-पक्षियों की सुरक्षा को सुनिश्चित किया जा सके. इसको लेकर शासन सचिव, पशुपालन, गोपालन एवं मत्स्य डॉ. समित शर्मा ने चाइनीज मांझे (नायलॉन/सिंथेटिक पतंग डोर) के उपयोग पर पूरी तरह से प्रतिबंध के बावजूद इसके अवैध उपयोग से पशु-पक्षियों को हो रही गंभीर चोटों और मृत्यु की घटनाओं लेकर चिंता जाहिर की है. साथ ही इस मामले में कार्रवाई करने का भी निर्देश दिया है.
उन्होंने कहा कि पुलिस और स्थानीय प्रशासन सघन तलाशी अभियान चलाकर प्रतिबंधित मांझे के स्टॉक को तत्काल जब्त कर इसके निर्माण, स्टोरेज और बिक्री पर पूरी तरह से रोक लगाए. साथ ही उल्लंघन करने वालों पर पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 और भारतीय न्याय संहिता 2023 के तहत कार्रवाई करे.
राज्य में जारी हुई ये गाइडलाइन
उन्होंने बार-बार उल्लंघन करने वाले विक्रेताओं के लाइसेंस निरस्त करने की प्रक्रिया भी शुरू करने के निर्देश दिए.
उन्होंने कहा कि जन जागरूकता अभियान चलाकर स्कूलों, कॉलेजों में विद्यार्थियों को प्रतिबंधित मांझा उपयोग न करने की शपथ दिलाने तथा सोशल मीडिया एवं अन्य माध्यमों से आमजन को केवल सूती धागे के उपयोग के लिए प्रेरित किया जाए.
व्यापार संघों के साथ बैठक कर उन्हें इसके बिक्री के बहिष्कार के लिए प्रेरित किया जाए.
डॉ शर्मा ने कहा कि सभी जिलों में घायल पक्षियों के त्वरित उपचार के लिए पशुपालन विभाग एवं स्वयंसेवी संस्थाओं के समन्वय से विशेष पक्षी चिकित्सा शिविर’ आयोजित किए जाएं.
हेल्पलाइन नंबर जारी कर उसका व्यापक प्रचार-प्रसार भी सुनिश्चित किया जाए. शासन सचिव ने कहा कि चाइनीज मांझा न केवल पक्षियों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है बल्कि ये गैर बायोडिग्रेडेबल होने के कारण पर्यावरण के लिए भी घातक है.
उन्होंने आम लोगों से भी अपील की है कि वे पतंगबाजी के दौरान केवल सूती/परंपरागत मांझे का ही उपयोग करें तथा चाइनीज मांझे की खरीद, बिक्री अथवा उपयोग से पूरी तरह से परहेज करें.
उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि यदि कहीं चाइनीज मांझे का अवैध उपयोग या बिक्री दिखाई दे तो तुरंत संबंधित प्रशासन को सूचित करें.
साथ ही, खुले में पड़े मांझे के टुकड़ों को सुरक्षित तरीके से एकत्र कर नष्ट करें तथा पशु-पक्षियों को इससे बचाने के लिए भी विशेष सतर्कता और सावधानी रखें.
डॉ. शर्मा ने पशुपालन विभाग के सभी अधिकारियों तथा कर्मचारियों को भी निर्देश दिए कि घायल पशु-पक्षियों के उपचार हेतु तत्पर रहें और ऐसे मामलों में त्वरित चिकित्सा सुविधा की उपलब्धता सुनिश्चित करें.











